वर्ष 2022 में भारत व यूएई में कारोबारी समझौता हुआ था (फोटो: पीटीआई)
जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने सोमवार को तीन घंटे से कुछ ज्यादा समय नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ बिताए, लेकिन इस अल्पावधि में ही दोनों नेताओं ने भारत एवं यूएई के द्विपक्षीय संबंधों के नए युग की शुरुआत कर दी। इस दौरान भारत और यूएई के बीच रणनीतिक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले की वार्ता हुई।
द्विपक्षीय कारोबार को वर्ष 2032 तक दोगुना कर 200 अरब डॉलर से पार करने का लक्ष्य रखा गया। धोलेरा (गुजरात) में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, हवाई जहाजों की मरम्मत करने की सुविधा स्थापित करने और पायलटों के लिए प्रशिक्षण केंद्र खोलने में यूएई के निवेश को अंतिम रूप दिया गया। साथ ही ऊर्जा सहयोग को प्रगाढ़ करते हुए एलएनजी खरीद का दीर्घकालिक समझौता किया गया। कुल एक दर्जन समझौता पत्रों पर हस्ताक्षर हुए हैं या इनसे जुड़े मुद्दों पर सहमति बनी है।
यूएई और भारत के बीच रणनीतिक संबंध
यूएई और भारत के बीच रणनीतिक संबंध हैं। साथ ही दोनों नेताओं के बीच भी व्यक्तिगत संबंध हैं। प्रधानमंत्री मोदी स्वयं यूएई के राष्ट्रपति की आगवानी करने नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचे और उन्हें अपने साथ एक ही कार में प्रधानमंत्री आवास तक लेकर आए, जहां दोनों नेताओं के बीच लंबी वार्ता हुई। दोनों नेताओं के बीच ईरान की स्थिति, गाजा में शांति स्थापित करने की अमेरिकी पहल और यमन के हालात पर भी चर्चा हुई है। शेख मोहम्मद ने उस समय भारत की यात्रा की है, जब यमन को लेकर यूएई और सऊदी अरब में तनाव चल रहा है।
भारत के दोनों देशों के साथ रणनीतिक संबंध हैं। ऐसे में विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने कहा, \“भारत और यूएई के बीच रणनीतिक रक्षा सहयोग समझौते की दिशा में आगे बढ़ने पर पश्चिम एशिया में काल्पनिक घटनाक्रमों में शामिल होने की कोई योजना नहीं है। यूएई के साथ रक्षा और सुरक्षा क्षेत्र में हमारी भागीदारी का यह मतलब जरूरी नहीं कि हम क्षेत्रीय संघर्षों में किसी विशेष तरीके से शामिल हो जाएंगे। भारत और यूएई के बीच रक्षा सहयोग काफी व्यापक है।\“
यूएई का निवेश आने का रास्ता साफ
वर्ष 2022 में भारत व यूएई में कारोबारी समझौता हुआ था। इससे द्विपक्षीय कारोबार बढ़ाने में मदद मिली है और अब इसे वर्ष 2032 तक दोगुना करने पर सहमति बनी है। यूएई ने छह वर्ष पहले भारत में 100 अरब डॉलर का नया निवेश करने की बात कही थी। सोमवार की बैठक में गुजरात सरकार की तरफ से विकसित हो रहे धोलेरा औद्योगिक शहर में अब यूएई का निवेश आने का रास्ता साफ होता दिख रहा है। विदेश सचिव ने बताया कि वहां यूएई के निवेश से अंतराष्ट्रीय हवाई अड्डा बनाने से लेकर शहरी विकास करने समेत कई क्षेत्रों में निवेश को लेकर सहमति बनी है।
इसी तरह से सोमवार को एक समझौता हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और अबुधाबी नेशनल आयल के बीच हुआ, जिसके तहत वर्ष 2028 से अगले दस वर्षों तक भारत को पांच लाख मीट्रिक टन एलएनजी की आपूर्ति की जाएगी। ऊर्जा क्षेत्र में दूसरी सहमति बनी है परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में। हाल ही में भारतीय संसद में पारित शांति कानून से मिले अवसर को देखते हुए भारत व यूएई छोटे व बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र लगाने में सहयोग करेंगे। दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष सेक्टर में सहयोग को लेकर एक अहम समझौते पर हस्ताक्षर हुए हैं जिसके तहत राकेट निर्माण से लेकर उनकी लांचिंग स्थल के निर्माण से लेकर, प्रशिक्षण केंद्र आदि स्थापित किया जाएगा।
एक बड़ा समझौता खाद्य क्षेत्र में हुआ है जिसके तहत भारत से यूएई को चावल, खाद्य उत्पाद व कृषि उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा दिया जाएगा। इसका फायदा सीधे तौर पर भारतीय किसानों को होगा।दोनों देशों के बीच एक परियोजना पर सिद्धांत रूप में सहमति बनी है, जिसमें अबू धाबी में \“हाउस आफ इंडिया\“ नामक सांस्कृतिक स्थल की स्थापना शामिल है। यह स्थान भारतीय कला, विरासत और पुरातत्व के एक संग्रहालय सहित अन्य सुविधाओं से युक्त होगा। दोनों नेताओं ने अपने-अपने पक्षों को निर्देश दिया कि वे परस्पर मान्यता प्राप्त संप्रभु व्यवस्थाओं के तहत भारत व यूएई के बीच \“डिजिटल दूतावास\“ स्थापित करने की संभावना का पता लगाएं। यह एक नया सोच है।
राष्ट्रपति को भेंट किया गुजरात का नक्काशीदार झूला
प्रधानमंत्री मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति को पारंपरिक भारतीय उपहार भेंट किए, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक हैं। इनमें गुजरात का हाथ से नक्काशी किया हुआ रायल वुडन झूला (झूला) प्रमुख है जिसे गुजराती परिवारों में एकता, बातचीत और पीढि़यों के बीच बंधन का प्रतीक माना जाता है। यह उपहार 2026 को यूएई द्वारा घोषित \“फैमिली ईयर\“ से भी गहराई से जुड़ा है।
साथ ही यूएई की शेख फातिमा बिंत मुबारक अल खेतबी को कश्मीर की पश्मीना शाल भेंट की गई। इसे तेलंगाना में बने सजावटी सिल्वर बाक्स में रखकर भेंट किया गया है। उन्हें कश्मीरी केसर (सजावटी सिल्वर बाक्स में) भी भेंट की गई, जो तीव्र सुगंध के लिए प्रसिद्ध है। ये उपहार भारत की हस्तशिल्प, हैंडलूम और सांस्कृतिक धरोहर को उजागर करते हैं।
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