किश्तवाड़ में जैश के आतंकी ठिकाने का भंडाफोड़ (फाइल फोटो)
जागरण संवाददाता, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में सुरक्षाबलों को एक बड़ी सफलता मिली है। सोमवार को सेना के जवानों ने छतरू के सिंहपोरा इलाके में 12,000 फीट की ऊंचाई पर जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों के एक अंडरग्राउंड ठिकाने का भंडाफोड़ किया है।
सेना से जुड़े सुत्रों के अनुसार, यह आतंकियों ने यह ठिकाना बहुत चालाकी से बनाया था। इसमें कई एंट्री और एग्जिट पॉइंट और यहां एक बार में चार से ज्यादा आतंकवादी रह सकते थे। यहां से खाना पकाने की गैस, देसी घी, अनाज और कंबल जैसी जरूरी चीजे बरामद की गई। चौकानें वाली बता यह है कि जब्त किया गया राशन लगभग छह महीने तक चल सकता था।
बता दें, किश्तवाड़ को अपना गढ़ बना रहे आतंकियों को खदेड़ने के लिए भारतीय सेना “ऑपरेशन त्राशी-I“ चला रही है, जिसका मकसद इस इलाके में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों को खत्म करना है।
यह ऑपरेशन रविवार को आतंकवादियों की मौजूदगी के बारे में खुफिया जानकारी मिलने के बाद शुरू किया गया था। इस दौरान आतंकवादियों के साथ गोलीबारी में एक सैन्यकर्मी वीरगति को प्राप्त हो चुका है। बलिदान हुए जावन की पहचान हवलदार गजेंद्र सिंह के रूप में हुई है।
किश्तवाड़ में सेना ने जैश का भूमिगत आतंकी ठिकाना ध्वस्त किया, 6 महीने का राशन बरामद pic.twitter.com/bTjsMAdyYc — Shivaji Mishra (@ShivajiMis40490) January 19, 2026
आतंकियों का बंकरनुमा ठिकाना नष्ट किया जा चुका है, लेकिन आतंकी घेराबंदी तोड़ भागने में कामयाब रहे हैं। यह मौजूदा वर्ष में किश्तवाड़ में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच पहली मुठभेड़ है।
आतंकियों के पकड़े गए ओवरग्राउंड वर्करों से जानकारी मिली है कि यह आतंकी न सिर्फ इलाके की भौगोलिक परिस्थितियों से पूरी तरह परिचित हैं, बल्कि फॉरेस्ट वॉरफेअर, माउंटेन वॉरफेअर और गुरिल्ला वॉरफेअर में पूरी तरह प्रशिक्षित हैं। यह किसी आम नागरिक के संपर्क में तभी आते हैं, जब उन्हें कोई खास जरूरत होती है।
यह अपने ओवरग्राउंड वर्कर से या सीमा पार बैठे अपने हैंडलरों से कुछ विशेष मोबाइल ऐप्स के जरिए ही संपर्क करते हैं। अपने लिए यह साजो सामान जुटाने के लिए यह किसी एक ओवरग्राउंड वर्कर पर निर्भर नहीं रहते और किसी को अपने ठिकाने तक आने भी नहीं देते।
किश्तवाड़ को जिला डोडा, जिला उधमपुर और जिला कठुआ के अलावा कश्मीर घाटी के जिला अनंतनाग से जोड़ने वाले कई प्राकृतिक रास्ते हैं। इसलिए यह आतंकियों के लिए एक कॉरीडोर की तरह काम करता है। इस पूरे क्षेत्र के कई आतंकी इस समय पाकिस्तान में हैं और उनका स्थानीय नेटवर्क इन आतंकियों के लिए आंख नाक कान बना हुआ है।
बीते वर्ष किश्तवाड़ में हुई मुठभेड़ें
- 12 अप्रैल 2025- छातरु के ऊपरी भाग में सुरक्षाबलों ने तीन आतंकियों को मार गिराया
- 22 मई 2025- सिंगपोरा इलाके में हुई मुठभेड़ में दो आतंकी ढ़ेर, एक सैन्यकर्मी वीरगति को प्राप्त
- 2 जुलाई 2025- छातरु के जंगल में आतंकियों का एक दल मुठभेड़ में बच निकला
- 11 अगस्त 2025- दुल किश्तवाड़ में आतंकी एक मुठभेड़ में बच निकले
- 13 सितंबर- नायदग्राम छातर में आतंकियों के हमले में एक जेसीओ समेत दो सैन्यकर्मी वीरगति को प्राप्त हुए
- 21 सितंबर 2025- छातरु में आतंकियों का दल सुरक्षाबलों की घेराबंदी तोड़ भाग निकला
- 4 नवंबर 2025- छातरु में आतंकियों का दल सुरक्षाबलों की घेराबंदी तोड़ भाग निकला
सुरक्षाबलों द्वारा अपनायी जा रही रणनीति
किश्तवाड़ में सक्रिय आतंकियों के सफाए के लिए सुरक्षाबल लगातार इलाके की घेराबंदी कर रहे हैं, जिसमें सेना, पुलिस और अर्धसैनिक बलों सहित कई टीमें ड्रोन और खोजी कुत्तों की मदद से इलाके की तलाशी ले रही हैं। इस अभियान में सेना के प्रशिक्षित कमांडो दस्ते के अलावा राष्ट्रीय राइफल्स के जवान मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।
आतंकियों को पकड़ने के लिए उन सभी रास्तों पर विशेष नाके लगाए गए हैं, जिनका इस्तेमाल आतंकी एक इलाके से दूसरे इलाके में आवाजाही के लिए करते हैं। स्थानीय लोगों की आतंकरोधी अभियानों में भागीदारी बढ़ाने के लिए ग्राम रक्षा दलों को पूरी तरह से मजबूत किया जा रहा है। जंगल के साथ सटी बस्तियों में औचक तलाशी अभियान चलाने के साथ साथ उन सभी ढोकों की भी जांच की जा रही है, जिन्हें खानाबदोश गुज्जर-बक्करवाल समुदाय ने सर्दी बढ़ने के साथ ही खाली किया है। |
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