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लखनऊ में ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर धोखाधड़ी, ATS ऑफिसर बनकर जालसाजों ने एक दंपत्ति से लूटे ₹90 लाख

deltin33 1 hour(s) ago views 224
Lucknow cyber fraud: लखनऊ में साइबर क्राइम थाने की पुलिस ने शुक्रवार को साइबर ठगी करने वाले गैंग के तीन और सदस्यों को गिरफ्तार किया। इन लोगों ने उत्तर प्रदेश एंटी-टेररिज्म स्क्वॉड (ATS) के अधिकारी बनकर एक शहर के व्यक्ति को फर्जी “डिजिटल अरेस्ट” का डर दिखाया और उससे करीब 90 लाख रुपये ठग लिए।



पुलिस ने बताया कि धोखाधड़ी की शुरुआत 26 जनवरी को हुई, जब पीड़ित की पत्नी वीना बाजपेयी को ATS मुख्यालय में तैनात इंस्पेक्टर रंजीत कुमार होने का दावा करने वाले एक व्यक्ति का फोन आया। फोन करने वाले ने उन पर आतंकवाद और मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल होने का आरोप लगाया।



इसके बाद वीना को एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म सिग्नल डाउनलोड करने के लिए कहा गया। ऐप के माध्यम से, अजय प्रताप श्रीवास्तव नामक एक एटीएस अधिकारी ने परिवार से संपर्क किया और “डिजिटल जांच“ की।




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आरोपियों ने कथित तौर पर सुप्रीम कोर्ट के फर्जी आदेश और जब्ती दस्तावेज दिखाकर दावा किया कि दंपति के बैंक खातों की जांच चल रही है।



पीड़ित ने जालसाजों के खाते में 90 लाख रुपये ट्रांसफर किए



पीड़ित और उनकी पत्नी को “वेरिफिकेशन“ के लिए अपनी बचत राशि ट्रांसफर करने के लिए राजी किया गया। 29 जनवरी से 9 फरवरी के बीच, उन्होंने RTGS लेनदेन के माध्यम से लगभग 90 लाख रुपये कई बैंक खातों में ट्रांसफर किए, जो जालसाजों द्वारा उपलब्ध कराए गए थे। पैसा मिलने के बाद, आरोपियों ने कथित तौर पर 11 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग की।



पुलिस ने मामले की गहराई से जांच शुरू की, जिसमें बैंक खातों की ट्रैकिंग, डिजिटल फॉरेंसिक और निगरानी शामिल थी। पुलिस ने इससे पहले गिरोह के पांच सदस्यों को दो चरणों में गिरफ्तार किया था- तीन को 17 फरवरी को और दो को 2 मार्च को - और उन्हें जेल भेज दिया।



3 आरोपी गिरफ्तार



शुक्रवार को, साइबर क्राइम टीम ने धीरज, स्पर्श कपूर और आशीष चंद्र सहित तीन और आरोपियों को गिरफ्तार किया।



धीरज ने पुलिस को बताया कि उसने स्पर्श कपूर के कहने पर राजाजीपुरम स्थित कोटक महिंद्रा बैंक की एक शाखा में राहुल पाल के नाम से एक बैंक खाता खुलवाने में मदद की, जिसके लिए उसे 8,000 रुपये मिले।



पुलिस ने दी जानकारी



पुलिस ने बताया कि स्पर्श कपूर ने बाद में उसी खाते से चेक के माध्यम से पैसे निकाले और आशीष चंद्र को सौंप दिए, जिसके बदले में उसे 10,000 रुपये कमीशन के रूप में मिले। जांचकर्ताओं ने पाया कि आशीष चंद्र ने धन के लेन-देन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।



आरोप है कि उसने कपूर को खाते से 2.45 लाख रुपये निकालकर नकद उसे देने के लिए कहा था। पुलिस के मुताबिक आशीष चंद्र ठगी से मिले पैसों को क्रिप्टोकरेंसी में बदलने का काम करता था।



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