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मिथिला विश्वविद्यालय में शुरू होगा शारीरिक शिक्षा निदेशालय, छात्रों को मिलेगा नया अवसर

Chikheang 2026-1-19 19:58:08 views 1238
  

यह तस्वीर जागरण आर्काइव से ली गई है।  



जागरण संवाददाता, दरभंगा। मिथिला के छात्रों और युवकों को खेल में करियर बनाने के लिए बिहार से बाहर मध्य प्रदेश या अन्य राज्यों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा। उन्हें अपनी ही माटी पानी में रहकर फुटबाल, वालीबाल, कबड्डी, खोखो और हैंड बाल जैसे लोकप्रिय खेलों में एक वर्षीय स्नातकोत्तर डिप्लोमा इन स्पोर्ट्स कोचिंग की पढ़ाई करने का अवसर मिलेगा।

इसके लिए स्ववित्तपोषित ढंग से शारीरिक शिक्षा निदेशालय की स्थापना की जा रही है।जिसके लिए विद्वत परिषद ने सोमवार को कुलपति प्रो. संजय कुमार चौधरी की अध्यक्षता में अपनी मंजूरी दे दी है। यह डिप्लोमा पाठ्यक्रम इसी साल अर्थात 2026-27 से चालू किया जाएगा।

विश्वविद्यालय की मीडिया प्रभारी ने बताया कि इसी सत्र से शारीरिक शिक्षा निदेशालय के अंतर्गत पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन स्पोर्ट्स जर्नलिज्म एंड मास मीडिया टेक्नोलाजी की नियमावली को भी विद्वत परिषद ने स्वीकृति दे दी है।

उन्होंने बताया कि डा. एपीजे अब्दुल कलाम महिला प्रौद्योगिकी संस्थान में दो वर्षीय एमसीए पाठ्यक्रम के सिलेबस और विश्वविद्यालय के अन्य कालेजों में संचालित बीसीए पाठ्यक्रम के लिए सभी आवश्यक प्रविधान को मंजूरी दी गई है।

विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग में एक वर्षीय पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन योगा एंड इथिक्स की पढ़ाई आरंभ करने के लिए नियम परिनियम को भी स्वीकृति प्रदान की गई है।

आर्टिफिशियल इंटीलिजेंस के लिए फारेंसिक साइंस पाठ्यक्रम के लिए बोर्ड आफ स्टडीज के गठन मंजूरी दी गई है। विश्वविद्यालय में अब मास्टर आफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट की भी पढ़ाई होगी। इसकी नियमावली और स्टडी बोर्ड का भी गठन किया गया है।

इनके अलावा दो वर्षीय मास्टर आफ फिजिकल एजुकेशन, मास्टर आफ योग/ मास्टर आफ योगिक साइंस और चार - वर्षीय बैचलर आफ फिजिकल एजुकेशन ( इंटीग्रेटेड कोर्स प्रोग्राम), तीन - वर्षीय बैचलर आफ फिजिकल एजुकेशन एंड स्पोर्ट्स को भी शुरू करने की मंजूरी पूर्ण सहमति से विद्वत परिषद् द्वारा पारित की गई।

उक्त निर्णयों द्वारा खेल एवं शारीरिक शिक्षा से उच्च शिक्षण प्रणाली और शोध के क्षेत्रों का विस्तार होगा। इसके साथ ही नई शिक्षा नीति के तहत योग सरीखे विषयों के अध्ययन -अध्यापन में नए प्रतिमानों को स्थापित किया जा सकेगा। बैठक में कुलसचिव प्रो. दिव्या रानी हंसदा, विद्वत परिषद् के सदस्यों के अलावा विश्वविद्यालय पदाधिकरी, विभागाध्यक्ष एवं प्रधानाचार्य उपस्थित थे।
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