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बिहार विश्वविद्यालय से जुड़े कॉलेजों में शिक्षकों के 818 पद खाली, छात्रों के भविष्य पर संकट

Chikheang 2026-1-19 13:56:41 views 1253
  

बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय। फाइल फोटो



जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय (BRABU) के अंगीभूत कॉलेजों से लेकर पीजी विभागों में सहायक प्राध्यापकों के 818 पद रिक्त हैं। वहीं, पीजी विभागों से लेकर 42 अंगीभूत महाविद्यालयों में कुल 778 शिक्षक कार्यरत हैं। इसमें सबसे अधिक साइंस संकाय में शिक्षकों के पद रिक्त हैं।

जूलॉजी में शिक्षकों के सबसे अधिक 93 सीटें खाली हैं। वहीं बॉटनी में 80 और रसायनशास्त्र में 85 पद रिक्त हैं। फिजिक्स में 77 सीटें खाली हैं। वहीं, सामाजिक विज्ञान संकाय में भी कई विषयों में सीटें अधिक खाली हैं। इसमें राजनीति विज्ञान में सबसे अधिक 82 सीटें और इतिहास में 77 सीटें रिक्त हैं।

जूलॉजी में 22 शिक्षक, बाटनी में 30 शिक्षक, रसायनशास्त्र में 32 शिक्षक, भौतिकी में 39 शिक्षक, राजनीति विज्ञान में 50 शिक्षक, इतिहास में 55 शिक्षक विभिन्न अंगीभूत महाविद्यालयों में कार्यरत हैं।

  

पिछले दिनों विश्वविद्यालय की ओर से विभिन्न विषयों में सहायक प्राध्यापकों की स्वीकृत सीटें, उसके विरुद्ध कार्यरत बल रिक्ति की जानकारी सरकार को उपलब्ध कराई गई थी। इसके बाद करीब तीन से चार विषयों में विश्वविद्यालय को शिक्षक मिले हैं।

कुलपति प्रो. डीसी राय ने बताया कि कई विषयों में शिक्षकों के पद रिक्त हैं। पूर्व में भी विभाग स्तर से मांगे जाने पर रिक्ति उपलब्ध कराई गई है, जिस पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।  
रिक्ति भेजने के बाद चार विषयों में पदस्थापन

विश्वविद्यालय की ओर से विभिन्न विषयों में शिक्षकों की रिक्त पदों की रिपोर्ट भेजने के बाद चार विषयों में शिक्षकों का पदस्थापन हुआ है। इसमें होम साइंस में सात, समाजशास्त्र में तीन, अंग्रेजी में 32 और अर्थशास्त्र में 52 सहायक प्राध्यापकों का पदस्थापन कॉलेजों से लेकर पीजी विभागों में हुआ है। पिछले दिनों राजनीति विज्ञान में भी सहायक प्राध्यापकों का पदस्थापन हुआ है।
स्नातक में बढ़ा नामांकन, शिक्षकों के नए पद सृजित नहीं

बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के सीनेट सदस्य प्रो. प्रमोद कुमार ने बताया कि विश्वविद्यालय के अंगीभूत कॉलेजों के स्नातक में पिछले तीन सत्रों में लगातार करीब 80 हजार से अधिक नामांकन हुए हैं। इसकी तुलना में सीटों का सृजन नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा सीटों का निर्धारण 1986 का बजट माना जाता है। उस समय स्नातक में 30 से 40 हजार विद्यार्थियों का नामांकन होता था। आज 80 हजार से अधिक छात्र स्नातक में नामांकन लेते हैं।

ऐसी स्थिति में सीबीसीएस पाठ्यक्रम के लागू होने के बाद नए पदों का सृजन किए बगैर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की बात बेमानी है। कॉलेज केवल डिग्री बांटने का संस्थान बन गए हैं।
बगैर शिक्षक ही परीक्षा में शामिल हो रहे विद्यार्थी

अंगीभूत कॉलेजों में शिक्षकों की कमी का सीधा असर पठन-पाठन पर पड़ रहा है। स्नातक में सेमेस्टर लागू होने के साथ ही अब हर छह महीने में परीक्षा होनी है। ऐसे में विद्यार्थी बगैर शिक्षकों के ही परीक्षा में शामिल हो रहे हैं। हर वर्ष कॉलेजों में नामांकन हो रहा है। छात्र-छात्राएं परीक्षा फॉर्म भर रहे हैं और उनकी परीक्षा कराई जा रही है।

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