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नैनीताल में मैदानों का प्रदूषण स्लोप विंड से पहुंचा, सूखे ने बढ़ाई चिंता

Chikheang 2026-1-18 07:27:34 views 732
  

पहाड़ भी प्रदूषित धुंध की चपेट से अछूते नहीं रहे। जागरण



रमेश चंद्रा, नैनीताल। पर्वतीय अंचल में प्रदूषित धुंध जैसी परिस्थितियों की वजह उत्तर भारत में चल रही शीतलहर के साथ स्लोप विंड यानी मैदानों से पर्वतों की ओर चलने वाली हवाएं है। जिस कारण गुरुवार को मैदानों से लगे पर्वतीय क्षेत्रों में धुंध छाई रहीं। इधर सूखे की स्थिति के साथ वातावरण में नमी में कमी जंगलों में आग की घटनाओं का स्वभाविक है।

आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान एरीज के वरिष्ठ वायुमंडलीय विज्ञानी डा नरेंद्र सिंह के अनुसार इसमें दोराय नहीं कि शीतकाल में वायु प्रदूषण में बढ़ोतरी निरंतर कुछ वर्षों से नजर आ रही है और मैदानी क्षेत्रों का प्रदूषण भी पहाड़ चढ़ने लगता है। जिस कारण पर्वतीय नैनीताल सरीखे पर्वतीय क्षेत्र भी यदाकदा धुंध में लिपट जाते हैं।

पहाड़ों में यह स्थिति तब बनती है, जब मैदानी भागों में कोहरा छंट जाता है। तब स्लोप विंड्स के साथ पॉल्यूटेड मैटर पहाड़ों तक पहुंच जाते हैं जो धुंध के रुप में दिखाई देते है । इस अवस्था में नैनीताल में पॉल्यूटेड मैटर (पीएम ) 2.5 बढ़ जाता हैं।

कई बार यह सामान्य से लगभग तीन गुना अधिक पहुंच जाता है। गुरुवार को पीएम की मात्रा सामान्य से अधिक देखी गई, जो सुबह के समय रही और दोपहर बाद इसमें कमी आई तो 25 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज की गई। प्रदूषण में वृद्धि का एक कारण सूखे जैसी स्थिति है।

  

वर्षा हो नहीं रही और वातावरण में मौजूद प्रदूषण न तो उठ पा रहा है और ना ही बैठ रहा है। इस बार पश्चिमी विक्षोभ पूरी तरह से निष्क्रिय साबित हुए हैं, जो इतने कमजोर हैं कि उत्तराखंड तक पहुंच पहुंच ही नहीं पा रहे हैं। जिस कारण सूखे की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

ऐसी स्थिति में नमी में 15 से 25 फीसद कमी आ गई है। जिस कारण जंगलों में सूखी पत्तियां जल्द आग पकड़ती हैं। लिहाजा सूखे के कारण आग की घटनाएं असमय हो रही हैं। यदि वर्षा नहीं हुई तो आग की घटनाओं में तेजी आएगी।

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सूखे ने तोड़ा 5 वर्ष का रिकार्ड

नैनीताल: नैनीताल पिछले 5 सालों में पहली बार पूरी तरह सूखे की चपेट में है। सिंचाई विभाग से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक इस बार अक्टूबर से 15 जनवरी के बीच पूरी तरह सूखा बना हुआ है। शीत का आधा समय सूखे की भेंट चढ़ चुका है और शेष डेढ़ माह पर उम्मीदें टिकी हुई हैं। इस दौरान वर्षा नहीं हुई तो पेयजल संकट ही उत्पन्न नहीं होगा, बल्कि तापमान तेजी से बढ़ेंगे और मौसम संबंधी अन्य दुश्वारियों से भी सामना करना पढ़ सकता है।

सिंचाई विभाग के नैनीताल में 1 अक्टूबर से दिसंबर तक हुई वर्षा के आंकड़े
2021 315 मिमी
2022 28मिमी
2023 48 मिमी
2024 78 मिमी
2925 शून्य
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