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IPS कैडर रिव्यू में देरी पर CAT ने जताई नाराजगी, केंद्र-राज्य को निर्देश- 120 दिन में निपटाएं प्रक्रिया, MP पुलिस एसोसिएशन ने लगाई थी याचिका

deltin33 2026-1-13 15:26:46 views 1106
  

IPS कैडर रिव्यू पर CAT का अहम आदेश (प्रतीकात्मक चित्र)



डिजिटल डेस्क, जबलपुर। केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने पुलिस अधिकारियों से जुड़े एक अहम मामले में बड़ा और दूरगामी असर वाला आदेश दिया है। कैट की सदस्य मालिनी अय्यर और सदस्य अखिल कुमार श्रीवास्तव की युगलपीठ ने स्पष्ट किया है कि कैडर रिव्यू कोई औपचारिक या विवेकाधीन प्रक्रिया नहीं, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार का अनिवार्य संवैधानिक दायित्व है।

ट्रिब्यूनल ने कहा कि इस दायित्व के निर्वहन में हुई देरी को प्रशासनिक उदासीनता या निष्क्रियता के आधार पर किसी भी तरह से उचित नहीं ठहराया जा सकता। कैट ने केंद्र और राज्य सरकार को अतिरिक्त कैडर रिव्यू की प्रक्रिया 120 दिनों के भीतर पूरी करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।
मप्र पुलिस एसोसिएशन की याचिका पर फैसला

यह आदेश मध्य प्रदेश पुलिस एसोसिएशन की ओर से दायर याचिका पर सुनाया गया। एसोसिएशन की तरफ से अधिवक्ता पंकज दुबे और अधिवक्ता आदित्य खंडेलवाल ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि भारतीय पुलिस सेवा (कैडर) नियम, 1954 के तहत प्रत्येक पांच वर्ष में कैडर रिव्यू किया जाना अनिवार्य है, लेकिन बीते लगभग दो दशकों से इस प्रक्रिया में लगातार देरी की जा रही है।
पदोन्नति और इंडक्शन से वंचित अधिकारी

याचिका में बताया गया कि कैडर रिव्यू में विलंब के कारण राज्य पुलिस सेवा के अनेक पात्र अधिकारी पदोन्नति और आईपीएस में इंडक्शन के अपने संवैधानिक अधिकार से वंचित हो रहे हैं। यदि यही स्थिति बनी रही तो कई अधिकारी 56 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा पार कर जाएंगे और उनके लिए इंडक्शन का अवसर हमेशा के लिए समाप्त हो जाएगा।

यह भी पढ़ें- अदालत की लाइव-स्ट्रीम कार्यवाही के दुरुपयोग पर MP हाई कोर्ट सख्त : इंस्टाग्राम-यूट्यूब को 48 घंटे में आपत्तिजनक URL हटाने के आदेश
अन्य राज्यों से बढ़ी असमानता

आवेदन में यह भी रेखांकित किया गया कि अन्य राज्यों की तुलना में मध्य प्रदेश के अधिकारी काफी पीछे रह गए हैं, जिससे गंभीर असमानता की स्थिति पैदा हो गई है।
मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर सख्त टिप्पणी

कैट ने अपने आदेश में कहा कि इस तरह की देरी से अधिकारियों के संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 के तहत प्रदत्त समानता और पदोन्नति के मौलिक अधिकार प्रभावित होते हैं। ट्रिब्यूनल ने सरकारों की निष्क्रियता को अधिकारियों के भविष्य से खिलवाड़ करार देते हुए राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों के पक्ष में राहतकारी और सख्त आदेश पारित किए हैं।
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