जमुई में राजस्व विभाग ने की बहुत बड़ी चूक, 4 एकड़ पौने तिरपन डिसमिल
अरविंद कुमार सिंह, जमुई। लक्ष्मीपुर प्रखंड के काला गांव से ही एक और ऐसे कागजी भू स्वामी का पता चला है, जिनकी जमीन का रकबा मुंगेर प्रमंडल के क्षेत्रफल से करीब दो गुना(41.11 लाख एकड़) है। इसके पहले भी उक्त गांव से ही रामदयाल मांझी के नाम 3.11 लाख एकड़ जमीन की आनलाइन जमाबंदी सामने आया था। वह जमाबंदी किसी उषा देवी के नाम पर धान बेचने के लिए किए गए आवेदन के साथ संलग्न किया गया था।
काला गांव के आनंद पांडे के आवेदन के साथ संलग्न आनलाइन जमाबंदी से सच्चाई सामने
यह जमाबंदी पंजी भी सहकारी समिति को धान बेचने के लिए पोर्टल पर समर्पित आवेदन के साथ संलग्न किया गया है। जमाबंदी आवेदक रैयत आनंद कुमार पांडे के परदादा दारो पांडे के नाम से है। उनके आफलाइन जमाबंदी अर्थात पंजी टू पर 452.75 डिसमिल यानि चार एकड़ पौने 53 डिसमिल जमीन दर्ज है। यह सब तथ्य धान रोपनी से कई गुना ज्यादा फसल कटनी की जागरण में प्रकाशित खबर के आलोक में हो रही जांच में सामने आ रहा है। अब तक हुई जांच में लक्ष्मीपुर प्रखंड अंतर्गत वास्तविक रकबा तथा किसानों द्वारा अपलोड रकबा के बीच का अंतर भले समाप्त होने के करीब आ गया है लेकिन जिले में अब भी रोपनी और कटनी के बीच करीब 17 लाख एकड़ रकबा का अंतर कायम है। खासकर झाझा, खैरा, चकाई,सोनो, सिकंदरा, बरहट तथा अलीगंज प्रखंड की विसंगति अब भी यथावत है।
परदादा दारो पांडेय का जमाबंदी पंजी में 4.53 एकड़ पर है स्वामित्व
दरअसल धान खरीद प्रक्रिया के अंतर्गत काला गांव निवासी कपिल देव पांडेय के पुत्र आनंद कुमार पांडेय ने 250 क्विंटल संभावित धान की मात्रा बेचने के लिए आनलाइन आवेदन किया। उक्त आवेदक के साथ ही उन्होंने अपने परदादा डारो पांडे के नाम कायम आनलाइन जमाबंदी पंजी संलग्न किया। उक्त पंजी में ही खाता संख्या 47 और 48 तथा खेसरा संख्या जीरो में रकबा 41 लाख 12 हजार 119 एकड़ दर्ज था। लिहाजा धान उत्पादन के लिए बोवाई की गई जमीन का विवरण कालम में वही रकबा दर्ज हो गया, जिसने न सिर्फ लक्ष्मीपुर बल्कि पूरे जिले की काटी गई फसल की रकबा में अप्रत्याशित उछाल ला दिया।
17 लाख एकड़ की और बची है गड़बड़ी
स्थिति यह हो गई की जमुई जिले में 1.67 लाख एकड़ में धान की हुई रोपनी की सरकारी रिपोर्ट के विरुद्ध किसानों के आवेदन में धान की कटनी का रकबा 62 लाख एकड़ पहुंच गया। इस विसंगति को दैनिक जागरण ने रेखांकित किया और सात जनवरी के अंक में प्रमुखता से खबर प्रकाशित हुई। इसके बाद विभाग के निबंधक रजनीश कुमार सिंह ने प्रदेश भर में इसकी जांच करानी प्रारंभ की। इस जांच में सर्वाधिक विसंगति मधुबनी जिले में पाई गई है।
- 1.67 लाख एकड़ में रोपनी के विरुद्ध 62 लाख एकड़ में किसानों ने काटी थी फसल
- इसके पहले भी काला गांव में ही 3.11 लाख का कथित मालिक मिला था रामदयाल मांझी
- आनलाइन जमाबंदी में गड़बड़ी का सामने आ रहा नतीजा
बताया जाता है कि आवेदन के साथ किसानों द्वारा दी गई जानकारी में वहां का रकबा 19.52 अरब एकड़ है। इसके अलावा बांका, भागलपुर, पूर्वी चंपारण, गया, मुजफ्फरपुर, नालंदा, पटना, पूर्णिया, सहरसा, समस्तीपुर, शेखपुरा तथा सुपौल जिले में भी व्यापक विसंगति पाई गई है। |