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सोन नदी जल बंटवारे पर बिहार-झारखंड सहमत, पटना में बिजली आपूर्ति अंडरग्राउंड केबलिंग से

Chikheang 2026-1-13 12:57:30 views 442
  

बिहार-झारखंड के बीच सोन नदी जल विवाद खत्म



राज्य ब्यूरो, पटना। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य के विभिन्न विभागों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। इन फैसलों का सीधा असर बुनियादी ढांचे, कृषि व्यवस्था, जल संसाधन प्रबंधन, रोजगार और प्रशासनिक सुधारों पर पड़ेगा। बैठक में कुल 43 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
53 वर्ष बाद सुलझा सोन नदी जल बंटवारे का मामला

मंत्रिमंडल ने करीब 53 वर्ष बाद बिहार और झारखंड के बीच लंबे समय से लंबित सोन नदी जल बंटवारे के विवाद को सुलझा लिया है। बैठक के बाद कैबिनेट के अपर मुख्य सचिव अरविंद चौधरी ने बताया कि वर्ष 1973 में बिहार, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच हुए बाणसागर समझौते के अनुसार अविभाजित बिहार को 7.75 मिलियन एकड़ फीट जल का आवंटन हुआ था। राज्य विभाजन के बाद झारखंड द्वारा जल बंटवारे की मांग उठाई जा रही थी, जिसके कारण बिहार की इंद्रपुरी जलाशय परियोजना पर सहमति नहीं बन पा रही थी।

10 जुलाई 2025 को रांची में हुई पूर्वी क्षेत्रीय परिषद की बैठक में विचार-विमर्श के बाद दोनों राज्यों के बीच सहमति बनी कि 7.75 मिलियन एकड़ फीट जल में से 5.75 मिलियन एकड़ फीट बिहार और 2.00 मिलियन एकड़ फीट झारखंड को मिलेगा। इस सहमति के प्रारूप को आज मंत्रिपरिषद ने स्वीकृति दे दी। इससे इंद्रपुरी जलाशय परियोजना का रास्ता साफ होगा और भोजपुर, बक्सर, रोहतास, कैमूर, औरंगाबाद, पटना, गया और अरवल जिलों में सिंचाई सुविधा को मजबूती मिलेगी।
पटना में भूमिगत केबलिंग से बिजली आपूर्ति

मंत्रिमंडल ने पटना शहर में अंडरग्राउंड केबलिंग के माध्यम से बिजली आपूर्ति की परियोजना को मंजूरी दी है। इस योजना पर कुल 653 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

परियोजना के तहत पेसू के अंतर्गत 13 प्रमंडलों में भूमिगत केबलिंग से निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
शिक्षा में नवाचार को बढ़ावा

मंत्रिमंडल ने वर्ष 2025-26 के लिए 789 माध्यमिक एवं उच्च माध्यमिक सरकारी विद्यालयों हेतु 14 अरब 85 करोड़ 50 लाख रुपये की स्वीकृति दी है।

इस राशि से पीएम श्री योजना के अंतर्गत चयनित विद्यालयों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप कक्षा 6 से 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए आधुनिक शिक्षण कौशल, नवाचार और तकनीकी साक्षरता को बढ़ावा दिया जाएगा।
ऊर्जा और औद्योगिक विकास को गति

बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के अंतर्गत इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (आईएमसी), गयाजी के लिए 220 केवी डीसी संचरण लाइन के निर्माण को मंजूरी दी गई है।

यह लाइन 400/220/132 केवी चंदौती ग्रिड उपकेंद्र से आईएमसी, गयाजी तक बनेगी। इसके लिए 33.29 करोड़ रुपये की योजना स्वीकृत की गई है।
नौकरी, पद सृजन और प्रशासनिक सुधार

कृषि विभाग के तहत 694 पदों के पुनर्गठन एवं सृजन को स्वीकृति दी गई है, जिसमें पौधा संरक्षण पर्यवेक्षक और निरीक्षक के नए पद शामिल हैं।

इसके अलावा वन एवं पर्यावरण सलाहकार के एक गैर-संवर्गीय पद का अस्थायी सृजन, मत्स्य निदेशालय के 200 पदों का पुनर्गठन और बिहार कार्यपालिका संशोधन नियमावली, 2025 को स्वीकृति दी गई।

मंत्रिपरिषद ने बिहार आनंद कारज विवाह निबंधन नियमावली, 2025 को मंजूरी दी। बिहार भवन, मुंबई के निर्माण के लिए 314.20 करोड़ रुपये की प्रशासनिक स्वीकृति दी गई।

खरीफ विपणन मौसम 2025-26 और रबी विपणन मौसम 2026-27 के लिए 7000 करोड़ रुपये के ऋण पर राजकीय गारंटी देने का निर्णय लिया गया।

इसके अलावा दरभंगा हवाई अड्डा के समीप लॉजिस्टिक पार्क एवं कार्गो हब निर्माण के लिए 138.82 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि स्वीकृत की गई।

अधिवक्ताओं के कल्याण के लिए 30 करोड़ रुपये की सहायता, पॉलिटेक्निक बगहा के लिए 106 पदों का सृजन तथा तकनीकी शिक्षा से जुड़े कई प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई।

इन सभी निर्णयों को राज्य के समग्र विकास, प्रशासनिक सुगमता और जनहित की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
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