search

‘राम परिवार’ के मूर्तिकार ने किया कमाल, सिगरेट बट्स से बनाईं अनोखी आकृतियां, मुंबई में लगी प्रदर्शनी

cy520520 2026-1-13 05:57:41 views 1232
  



लवलेश कुमार मिश्र, अयोध्या। राम मंदिर के प्रथम तल पर प्रतिष्ठित ‘राम परिवार’ की प्रतिमाओं को आकार देने वाले मूर्तिकार प्रशांत पांडेय इन दिनों देश की औद्योगिक राजधानी मुंबई में धमाल मचा रहे हैं। कोलाबा के मस्कारा गैलरी में उनकी एकल प्रदर्शनी लगी है, जिसमें उन्होंने सिगरेट बट्स से बनाई विभिन्न आकृतियों को प्रदर्शित किया है।

इन सिगरेट बट्स को प्रशांत ने विभिन्न शहरों की सड़कों, फुटपाथों व सार्वजनिक स्थलों से एकत्रित किया है और अपने हुनर से लगभग साढ़े तीन लाख अनुपयोगी बट्स को मिलाकर अलग-अलग कलाकृतियां निर्मित की हैं। आठ जनवरी से शुरू हुई प्रदर्शनी 28 फरवरी तक चलेगी। उन्होंने रामनगरी के लोगों को भी आमंत्रित किया है।

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने गत वर्ष पांच जून को राम मंदिर के प्रथम तल पर जिस राम परिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों प्रतिष्ठित कराया था, उसमें स्थापित सभी छह प्रतिमाओं का निर्माण राजस्थान के जयपुर के प्रख्यात मूर्तिकार सत्यनारायण पांडेय, उनके भाई पुष्पेंद्र पांडेय व पुत्र प्रशांत पांडेय ने किया था। इसी परिवार ने छह पूरक मंदिरों की प्रतिमाएं भी बनाई हैं। ट्रस्ट के आमंत्रण पर यह परिवार सामूहिक प्राण प्रतिष्ठा में राम मंदिर भी पहुंचा था।

देशभर में मिल रही प्रसिद्धि

‘राम परिवार’ की प्रतिमाओं की भव्यता व दिव्यता का दर्शन कर जहां प्रत्येक रामभक्त मुग्ध हो रहे हैं, तो पांडेय परिवार को पूरे देश में प्रसिद्धि मिल रही है। सत्यनारायण पांडेय के पुत्र व युवा कलाकार प्रशांत ने अनुपयोगी व तिरस्कृत सिगरेट बट्स को सहेज कर न केवल उनसे कलाकृतियां बनाईं, बल्कि प्रदर्शनी लगा कर लोगों को यह सोचने पर विवश कर दिया है कि प्रकृति की प्रत्येक वस्तु प्रतिभा के बूते उपयोगी बन जाती है। बस, जरूरत है समाज को अपनी सोच बदलने की।

प्रशांत पांडेय ने ‘दैनिक जागरण’ से बातचीत में बताया कि महत्वहीन सिगरेट बट्स को मिलाकर सुंदर कलाकृतियां बनाई जा सकती हैं। वह कहते हैं, हर सिगरेट बट एक पल का प्रतीक है। वह बातचीत के बीच का ठहराव, समय के गुजरने का संकेत या राहत का एक छोटा-सा क्षण है। अकेले में ये बट्स भले महत्वहीन लगें, परंतु एक साथ मिलकर वे त्वचा, पत्तियाें, अंगों और ब्रह्मांडीय आकृतियों जैसी संरचनाओं का रूप ले लेते हैं।

उन्होंने बताया कि यह परियोजना पांच वर्ष में धीरे-धीरे विकसित हुई है। हर पत्ती जैसी आकृति को बनाने में लगभग एक महीना लगता है। बट्स को इकट्ठा करने, साफ करने, बांधने और बुनने की लंबी प्रक्रिया से गुजरते हुए ये कलाकृतियां आकार ले लेती हैं। प्रदर्शनी में पहुंचने वाले दर्शकों को हवा में झूलती, बहती और एक-दूसरे में घुलती आकृतियां दिखाई देंगी। यह किसी स्मारक की तरह नहीं, बल्कि जीवंत दस्तावेज की तरह अनुभव होती है।

प्राण प्रतिष्ठा में नहीं चयनित हुई थी सत्यनारायण की प्रतिमा

कलाकार प्रशांत पांडेय के पिता व मूर्तिकार सत्यनारायण पांडेय ने 22 जनवरी 2024 को राम मंदिर में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के अवसर पर भी ट्रस्ट के आग्रह पर प्रतिमा बनाई थी। यद्यपि उनकी ओर से बनाई गई रामलला की प्रतिमा अंतिम क्षण में चयनित नहीं हुई थी, परंतु इसे भी ट्रस्ट ने सहेज कर रखा है। इसके बाद पांडेय परिवार को ट्रस्ट ने राम परिवार व पूरक मंदिरों की प्रतिमाएं बनाने का दायित्व सौंपा था।
like (0)
cy520520Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
cy520520

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1610K

Credits

Forum Veteran

Credits
164000