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14 या 15 जनवरी, कब है मकर संक्रांति? पंडितों ने शुभ वैवाहिक मंगल कार्य को लेकर भी दी जानकारी

cy520520 2026-1-12 17:57:33 views 500
  

भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा की बैठक हापुड़ स्थित श्री नीलकंठ महादेव मंदिर में हुई।



संवाद सहयोगी, गढ़मुक्तेश्वर। भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा की बैठक हापुड़ स्थित श्री नीलकंठ महादेव मंदिर में हुई, जिसमें मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) पर्व पर को लेकर चर्चा हुई। इस बैठक में बताया कि खरमास का समापन 14 जनवरी बुधवार को अपरांह 03:04 मिनट पर सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ होगा। अतः 14 जनवरी को ही मकर संक्रांति पर्व मनाया जाएगा।

भारतीय ज्योतिष कर्मकांड महासभा अध्यक्ष ज्योतिर्विद पंडित केसी पांडेय ने बताया कि सूर्य के संक्रांति समय से १६ घटी पूर्व और १६ घटी बाद का समय पुण्यकाल होता है। इसी प्रकार निर्णय सिंधु के अनुसार जब सूर्यास्त के पहले ही संक्रांति होती है तो उभयमत में पूर्व ही पुण्यकाल होता है।

मकर संक्रांति के बारे में धर्मग्रंथों के अनुसार जिस दिन सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है उसी दिन मकर संक्रांति होता है 14 जनवरी 2026 कृष्ण पक्ष एकादशी तिथि को सर्वार्थसिद्धि योग एवं अमृतसिद्धि शुभ योग के साथ सूर्य जिसका पुण्यकाल सुबह 8:39 बजे से विशेष मान्य होगा।
गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व

महासभा विद्वानों ने कहा कि 14 जनवरी 2026 को षटतिला एकादशी, अनुराधा नक्षत्र, बुधवार के दिन मकर संक्रांति होने से मंदाकिनी नामक संक्रांति है, जो और भी शुभ फलदायी होगी। जिसमें स्नान, दान करना अत्यंत पुण्यफल प्रदान करने वाला होगा। इस दिन गंगा स्नान और दान का विशेष महत्व है।

पद्मपुराण में मकर संक्रांति के दिन प्रातःकाल स्नान दान को उत्तम बताया गया है। स्कंद पुराण व कालिका पुराण में बताया गया है कि जो मनुष्य सूर्य के उत्तरायण होने अर्थात मकर संक्रांति के दिन ब्राह्मणों को तिल व तिल से बनी वस्तुओं, वस्त्रदान, सुवर्ण दान करता है, शिव मंदिर में तिल के तेल का दीपक जलाता है, तिल से हवन करता है उसकी समस्त इच्छाओं की पूर्ति होती है तथा समस्त पाप समाप्त हो जाते है।
वैवाहिक शुभ मंगल कार्य की शुरुआत तीन फरवरी से

मकर संक्रांति के दिन ही राजा सागर के 60000 पुत्रों को मोक्षप्राप्ति राजा भागीरथ के प्रयास से हुई थी। अतः इस दिन गंगासागर स्नान का विशेष विधान है। इस दिन स्नान करने से दस अश्वमेध यज्ञ तथा एक हजार गायों के दान का फल मिलता है। खरमास का समापन 14 जनवरी को होने के बाद भी शुक्र के 31 जनवरी 2026 तक अस्त रहने के कारण वैवाहिक शुभ मंगल कार्य की शुरुआत तीन फरवरी से होगी।

बैठक में पंडित ओमप्रकाश पोखरीयाल, आशुतोष शुक्ला, आदित्य भारद्वाज, अजय पांडेय, मित्र प्रसाद काफ्ले, ब्रजेश कौशिक, देवी प्रसाद तिवारी, करुण शर्मा आदि अन्य लोग मौजूद रहे।

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