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जांच के बीच बड़ा प्रशासनिक फेरबदल: दुलारचंद हत्याकांड के जांचकर्ता अपराजित लोहान का तबादला, मोकामा मामले पर उठे सवाल

deltin33 2026-1-10 11:27:00 views 1255
  

दुलारचंद हत्याकांड के जांचकर्ता अपराजित लोहान का तबादला



डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार की सियासत और अपराध की दुनिया को हिला देने वाले दुलारचंद यादव हत्याकांड की जांच के बीच बड़ा प्रशासनिक बदलाव सामने आया है। इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच कर रहे पटना ग्रामीण एसपी अपराजित लोहान का तबादला कर दिया गया है। उन्हें अब जहानाबाद का नया एसपी बनाया गया है, जबकि पटना ग्रामीण एसपी की जिम्मेदारी कुंदन कुमार को सौंपी गई है। इस तबादले ने न केवल प्रशासनिक गलियारों में बल्कि राजनीतिक हलकों में भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

दुलारचंद यादव की हत्या मोकामा विधानसभा क्षेत्र में 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान चुनावी रंजिश के चलते हुई थी। वे जनसुराज प्रत्याशी के समर्थक बताए जा रहे थे।

इस घटना के बाद इलाके में भारी तनाव फैल गया था और मामला सीधे सत्ता, राजनीति और बाहुबल के टकराव से जुड़ गया।

शुरुआत में पटना ग्रामीण एसपी विक्रम सिहाग इस मामले की निगरानी कर रहे थे, लेकिन कार्रवाई में ढिलाई के आरोपों के बीच उन्हें हटा दिया गया।

इसके बाद 2020 बैच के युवा आईपीएस अधिकारी अपराजित लोहान को पटना ग्रामीण एसपी बनाकर भेजा गया।

अपराजित लोहान की पोस्टिंग को तब एक सख्त संदेश के रूप में देखा गया था, खासकर तब जब मोकामा के निर्वाचित विधायक और कुख्यात बाहुबली अनंत सिंह की गिरफ्तारी हुई थी।

लोहान ने कार्यभार संभालते ही जांच को तेज किया और कई स्तरों पर कार्रवाई शुरू की। यही वजह है कि मात्र दो महीने के भीतर उनका तबादला होना अब चर्चा का विषय बन गया है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह तबादला सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया से अधिक संवेदनशील है। दुलारचंद हत्याकांड सीधे मोकामा की सत्ता-समीकरण से जुड़ा है, जहां अनंत सिंह जैसे प्रभावशाली नेता जेल में हैं।

अनंत सिंह ने जेल में रहते हुए ही विधानसभा चुनाव जीता और करीब 28 हजार वोटों से अपने प्रतिद्वंद्वी वीणा देवी को हराया। हालांकि उन्होंने अब तक विधायक पद की शपथ नहीं ली है और उनके पास केवल पांच महीने का समय शेष है।

अगर इस अवधि में वे शपथ नहीं लेते हैं, तो उनकी विधायकी पर संकट आ सकता है।

इस पूरे प्रकरण में अपराजित लोहान की भूमिका इसलिए भी अहम मानी जा रही थी क्योंकि वे अपनी सख्त और निष्पक्ष कार्यशैली के लिए जाने जाते हैं।

पटना ट्रैफिक एसपी रहते हुए उन्होंने कई बार यह साबित किया कि कानून सबके लिए बराबर है। नो-पार्किंग में खड़ी वीआईपी और नेताओं की गाड़ियों पर चालान कटवाने से लेकर सड़क पर खुद उतरकर व्यवस्था सुधारने तक, उनकी कार्यशैली ने उन्हें अलग पहचान दी।

हरियाणा के हिसार निवासी अपराजित लोहान ने आईआईटी बॉम्बे से केमिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है और स्वेच्छा से बिहार कैडर चुना था। ऐसे अधिकारी का जांच के बीच हटाया जाना इस मामले को और संवेदनशील बना देता है।

अब कुंदन कुमार के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही होगी कि वे दुलारचंद यादव हत्याकांड की जांच को उसी गति और निष्पक्षता से आगे बढ़ाएं।

फिलहाल अनंत सिंह जेल में हैं और उनकी जमानत याचिकाएं खारिज हो चुकी हैं। ऐसे में अपराजित लोहान का तबादला केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि मोकामा की राजनीति और कानून-व्यवस्था से जुड़े बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

अब सबकी नजर इस पर है कि नई टीम इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड को किस दिशा में ले जाती है।
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