search

बैक्टीरिया-वायरस और मनुष्य के जीन पर देखा जाएगा आयुर्वेद का असर, केंद्र के लिए आइसीएमआर ने मांगा प्रस्ताव

cy520520 2026-1-8 22:56:49 views 827
  



गजाधर द्विवेदी, गोरखपुर। आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति को आधुनिक वैज्ञानिक कसौटी पर परखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल होने जा रही है। क्षेत्रीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान केंद्र (आरएमआरसी) अब आयुर्वेदिक दवाओं का बैक्टीरिया, वायरस और मनुष्य के जीन पर पड़ने वाले प्रभाव का गहन शोध करेगा।

इस शोध का उद्देश्य यह समझना है कि आयुर्वेदिक औषधियां जीन के किस हिस्से पर जाकर कैसे असर करती हैं, ताकि इनके प्रभाव को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान की भाषा में स्पष्ट किया जा सके।

इस महत्वाकांक्षी शोध के लिए महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय में लगभग पांच करोड़ रुपये की लागत से एक समन्वित शोध केंद्र (कोलेबोरेशन सेंटर फार रिसर्च) की स्थापना की जाएगी। इसके लिए भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) ने प्रस्ताव और आवेदन आमंत्रित किया है। आरएमआरसी इस संबंध में विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर रहा है।


विशेषज्ञों का मानना है कि आयुर्वेदिक दवाएं प्रभावी हैं और अनेक रोगों में लाभ देती हैं, लेकिन अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि ये दवाएं शरीर के भीतर किस जैविक तंत्र पर कार्य करती हैं।

एलोपैथिक चिकित्सा में दवाओं के क्रियाविधि (मैकेनिज्म आफ एक्शन) को जीन और कोशिकीय स्तर तक समझा जाता है, जबकि आयुर्वेद में यह वैज्ञानिक व्याख्या अभी सीमित है। आरएमआरसी का यह शोध इसी अंतर को पाटने का प्रयास होगा।

इस परियोजना के अंतर्गत आयुर्वेदिक दवाओं के बैक्टीरिया और वायरस पर पड़ने वाले प्रभाव का भी अध्ययन किया जाएगा। खासतौर पर यह देखा जाएगा कि ये दवाएं संक्रमण फैलाने वाले सूक्ष्मजीवों की संरचना या उनकी कार्यप्रणाली को किस तरह से प्रभावित करती हैं। साथ ही मानव जीन पर इनके सकारात्मक व नकारात्मक प्रभावों को भी वैज्ञानिक तरीकों से परखा जाएगा।


इतना ही नहीं, एक ही रोग पर एलोपैथिक और आयुर्वेदिक दवाओं के अलग-अलग प्रभावों का तुलनात्मक अध्ययन भी किया जाएगा। इसके अलावा दोनों पद्धतियों की दवाओं के संयुक्त प्रयोग को भी शोध का हिस्सा बनाया जाएगा।

इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि किन परिस्थितियों में दोनों विधाओं का समन्वय रोगी के लिए अधिक लाभकारी हो सकता है और कहां सावधानी बरतने की जरूरत है। शोध कार्य में महायोगी गुरु गोरखनाथ आयुष विश्वविद्यालय के साथ-साथ बीआरडी मेडिकल कालेज के विशेषज्ञों का भी सहयोग लिया जाएगा। इससे आयुर्वेद और आधुनिक चिकित्सा के विशेषज्ञ एक साझा मंच पर आकर अनुसंधान कर सकेंगे।






आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में यह स्पष्ट हो चुका है कि एंटीबायोटिक बैक्टीरिया के जीन के किस हिस्से पर जाकर क्या काम करती है। आयुर्वेद की दवाओं से भी बीमारी ठीक होती है लेकिन उन्हें अभी तक वैज्ञानिक आधार नहीं मिल पाया है। इस शोध केंद्र से आयुर्वेदिक दवाओं को वैज्ञानिक आधार मिल सकेगा।


-

- डा. अशोक पांडेय, वायरोलाजिस्ट, आरएमआरसी


यह अध्ययन आयुर्वेद को वैज्ञानिक दृष्टि से समझने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा। इससे न केवल आयुर्वेदिक दवाओं की विश्वसनीयता बढ़ेगी, बल्कि दोनों चिकित्सा पद्धतियों के समन्वय से भविष्य में बेहतर और सुरक्षित उपचार के रास्ते भी खुलेंगे। केंद्र स्थापना का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।


-

- डा. हरिशंकर जोशी, निदेशक, आरएमआरसी
like (0)
cy520520Forum Veteran

Post a reply

loginto write comments
cy520520

He hasn't introduced himself yet.

510K

Threads

0

Posts

1610K

Credits

Forum Veteran

Credits
162400