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पॉक्सो एक्ट पर दिल्ली HC का बड़ा फैसला-छोटी बच्ची को प्राइवेट पार्ट छूने पर मजबूर करना गंभीर यौन हमला

Chikheang 2026-1-6 16:26:44 views 1031
  



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने फैसला दिया है कि यौन इरादे से किसी छोटे बच्चे को अपने निजी अंग छूने पर मजबूर करना, बच्चों का यौन अपराधों से संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत गंभीर यौन हमला है। न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा ने यह फैसला एक व्यक्ति की अपील खारिज करते हुए सुनाया, जिसे पोक्सो की धारा 10 (गंभीर यौन हमले की सजा) के तहत दोषी ठहराया गया था। व्यक्ति ने लगभग चार साल की एक लड़की के सामने अपना निजी अंग प्रदर्शित किया और उसे छूने पर मजबूर किया।

पॉक्सो के तहत, 12 वर्ष से कम उम्र के बच्चे पर यौन हमला गंभीर यौन हमला माना जाता है। अपीलकर्ता नाबालिग के घर में किरायेदार था। ट्रायल कोर्ट ने उसे जुलाई 2024 में दोषी ठहराया और सात वर्ष की कठोर कैद की सजा सुनाई। घटना जून 2022 की है।

कोर्ट ने कहा कि यौन इरादे से छोटे बच्चे को निजी अंग छूने पर मजबूर करना गंभीर यौन हमला है और इसलिए पोक्सो अधिनियम की धारा 10 के तहत अपराध साबित हो जाता है। अपील में कोई दम नहीं है, इसे लंबित आवेदनों सहित खारिज किया जाता है।

5 जनवरी को पारित फैसले में कोर्ट ने आरोपी के दावे को खारिज कर दिया कि पीड़िता को ट्यूटर किया गया था और उसके खिलाफ कोई ठोस सबूत नहीं है। कोर्ट ने कहा कि पीड़िता के बयानों में यौन हमले का मुख्य आरोप लगातार रहा और अभिव्यक्ति में छोटे-मोटे बदलाव उसकी विश्वसनीयता को प्रभावित नहीं करते।

कोर्ट ने यह भी कहा कि डीसीडब्ल्यू काउंसलर द्वारा दी गई काउंसलिंग, जो कानूनी रूप से अनिवार्य है, उसे ट्यूटरिंग नहीं कहा जा सकता, क्योंकि यह घटना के समय तीन वर्ष 11 महीने की पीड़िता को ट्रॉमा से निपटने में मदद करने के लिए की गई थी।

कोर्ट ने कहा कि अपीलकर्ता की मौजूदगी में जब बच्ची ने मां को घटना बताई तो आरोपित खुद ही शिकायतकर्ता और परिवार से पहले पुलिस स्टेशन पहुंच गया।  यह बच्ची और उसकी मां के बयानों की सच्चाई को दर्शाता है।

वहीं, कोर्ट ने एफआईआर दर्ज करने में देरी के आरोपी के बचाव को भी स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि देरी का पर्याप्त स्पष्टीकरण दिया गया है और यह घातक नहीं मानी जा सकती, क्योंकि नाबालिग की मां का दूसरे शहर से पति के लौटने का इंतजार करना स्वाभाविक था।

कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के उस अवलोकन से सहमति जताई कि बच्चों के यौन शोषण की घटनाएं शर्म, अपराधबोध और परिवार की इज्जत के कारण कम रिपोर्ट होती हैं। खासकर जब अपराधी परिचित व्यक्ति हो।

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