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बिहार में शराबबंदी के बाद इस नशे की गिरफ्त में आ रहे युवा, मेंटल हेल्थ पर पड़ता है बुरा असर

cy520520 2026-1-6 15:26:42 views 694
  



संवाद सूत्र, फुलकाहा (अररिया)। जिस युवा पीढ़ी के बल पर भारत आर्थिक महाशक्ति बन सकती है। वह आज नशे के दल-दल में धंसता जा रहा है। इन दिनों युवा पीढ़ी तेजी से नशे के आदी होते जा रहे हैं। किशोर और युवा में नशे की लत बढ़ रही है।

यह नशा स्मैक, शराब, गुटखा, खैनी, सिगरेट ही नहीं, बल्कि ब्राउन शुगर, गांजा, सनफिक्स, अफीम और चरस का है। इस तरह नशा करने की वजह से युवाओं की मानसिक स्थिति बिगड़ती जा रही है।

हमारे समाज में नशे को सदा बुराइयों का प्रतीक माना और स्वीकार किया गया है, लेकिन आजकल नशा यानी शराब पीना, सिगरेट पीना फैशन बनता जा रहा है, जबकि शराब को सभी बुराइयों का जड़ माना गया है।

शराब के सेवन से मानव के विवेक के साथ सोचने समझने की शक्ति नष्ट हो जाती है। वह अपने हित-अहित और भले-बुरे का अंतर नहीं समझ पाता। गांधीजी ने कहा था कि शराब के सेवन से मनुष्य के शरीर और बुद्धि के साथ-साथ आत्मा का भी नाश हो जाता है।
सस्ते नशे की गिरफ्त में आ रहे युवक

शराबी अनेक बीमारियों से ग्रसित हो जाता है। यहां तक कि बिहार में शराबबंदी है, फिर भी नरपतगंज प्रखंड के सीमावर्ती क्षेत्रों में युवा लगातार शराब और सूखा नशा स्मैक आदि नशा के चपेट में आ रहे हैं।

अमीर से गरीब और बच्चे से बुजुर्ग तक इस लत के शिकार हो रहे हैं। शराब के अतिरिक्त गांजा,अफीम और दूसरी नशीली चीजें भी काफी प्रचलन में है।

भारत नेपाल सीमा क्षेत्र के बच्चों एवं युवाओं में सनफिक्स के नशे का प्रचलन बढ़ रहा है। आमतौर पर किसी सामाग्री या कागज के टुकड़ों को चिपकाने के लिए लस्से के रूप में Sunfix का उपयोग होता है। किंतु कुछ महीनों से इसका उपयोग धड़ल्ले से नशे के लिए हो रहा है।
10-15 रुपये में मिलता है सनफिक्स

नरपतगंज प्रखंड के सीमावर्ती क्षेत्र के किराना दुकान, इलेक्ट्रोनिक, हार्डवेयर दुकान, मोबाइल दुकान एवं चायपान तथा कॉस्मेटिक आदि की दुकान में सहज उपलब्ध होने वाले सनफिक्स महज 10 से 15 रुपये में मिल जाता है।

इसके उपयोग के लिए बाजार में बिकने वाले प्लास्टिक के थैले में सनफिक्स के ट्यूब से निकाल कर उस लक्ष्य को डाला जाता है फिर इसके आदि हो चुके युवा एवं बच्चे इसे मुंह से फुला कर उसे सांस के द्वारा अपने अंदर खींचते हैं। दो तीन बार इस प्रक्रिया को करते हैं तो नशा चढ़ जाता है।
नशे की लत से बीमार हो रहे युवा

सनफिक्स की बिक्री पर प्रतिबंध नहीं है। इसलिए बिहार में शराबबंदी के बाद इसका प्रचलन बढ़ लगा है। जानकारों की माने तो इसके इस्तेमाल से मस्तिष्क पर गहरा असर होता है बाद में इसके नशेड़ी मानसिक एवं शारीरिक रूप से बीमार पड़ जाते हैं।

सनफिक्स कोई खाने योग्य पदार्थ नहीं है, यह जानकर भी इसे नशे के लिए उपयोग में ला कर बीमार पड़ रहे हैं। वहीं क्षेत्र के बुद्धिजीवियों ने बताया कि इस लत से युवाओं व बच्चों को बाहर निकालने के लिए इस पर प्रतिबंध लगाने की मांग पत्र भेज कर अररिया जिला पदाधिकारी से हम सभी क्षेत्र के ग्रामीण करेंगे।

उन्होंने कहा कि शराब की तरह हीं Sunfix पर प्रतिबंध लगा कर इसके लत से नये पीढ़ी को बचाया जा सकता है। बताते चलें कि कुछ दिन पूर्व सनफिक्स बिक्री पर पाबंदी लगाई गई थी, लेकिन यह पाबंदी कुछ दिनों तक रहा फिर दुकानदारों के द्वारा मंगा कर चोरी-छिपे बेच रहे हैं, जबकि सनफिक्स की मांग नेपाल में सबसे अधिक है।

बावजूद इसके यहां के बड़े-बड़े दुकानदार बड़ी मात्रा में मंगाकर तस्करी के माध्यम से नेपाल भी भेजते हैं, क्योंकि वहां पर पाबंदी नहीं है।
क्या कहते हैं चिकित्सक?

नरपतगंज सीएचसी प्रभारी डॉ  दीपक कुमार ने बताया कि इस तरह का नशा का सेवन करने से मस्तिष्क पर बुरा असर पड़ता है तथा पागलपन के शिकार होने की संभावना बढ़ जाती। ऐसे में बच्चे के माता पिता को चाहिए कि अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा दें ताकि आने वाले भविष्य में नशे का शिकार नहीं हो और इस शिकार से बच सके।

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