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Jharkhand PESA Rules: झारखंड में पेसा रूल लागू, पद खाली होने पर 1 महीने के अंदर होगा ग्रामसभा अध्यक्ष का चुनाव

Chikheang 2026-1-3 22:57:31 views 643
  

झारखंड पेसा नियमावली। (जागरण)



राज्य ब्यूरो, रांची। पेसा नियमावली के अनुसार ग्राम सभा सबसे सशक्त इकाई होगी। विशेष बैठक के पूर्व संबंधित ग्राम पंचायत में सार्वजनिक स्थानों पर इसकी एक प्रति को चिपकाया जायेगा और ग्राम सभा क्षेत्र में डुगडुगी या ढोल पिटवाकर घोषणा कर सूचना दी जाएगी। ग्राम सभा अध्यक्ष का पद रिक्त होने की स्थिति में एक महीने के अंदर अध्यक्ष का चुनाव कराना अनिवार्य होगा।

अध्यक्ष की मृत्यु / पद त्यागने या किसी अन्य कारण से पद खाली होने पर परंपरा से प्रचलित रीति-रिवाज के अनुसार नये ग्राम सभा अध्यक्ष का चुनाव / मनोनयन पद रिक्त होने के एक महीना के अन्दर किया जायेगा।

नये अध्यक्ष के चयन / मनोनयन के लिए 10 दिनों के अन्दर इसकी सूचना प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-सचिव पंचायत समिति / उप विकास आयुक्त-सह-मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, जिला परिषद् एवं जिला दंडाधिकारी / उपायुक्त को लिखित रूप से उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा।
एक साल के लिए नियुक्त होंगे ग्रामसभा के सहायक सचिव

नियमों के अनुसार ग्राम सभा अपने सदस्यों में से एक सहायक-सचिव का चुनाव कर सकेगी अथवा ग्राम सभा पूर्व में चयनित पंचायत सहायक का सहयोग सहायक सचिव के रूप में ले सकेगी।

ग्राम सभा अपने आवश्यकता अनुसार सहायक सचिव के कार्यों का निर्धारण कर सकेगी। ऐसे सहायक सचिव अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे। नियमों के अनुसार ग्राम सभा के सहायक-सचिव को एक वर्ष के लिए नियुक्त किया जा सकेगा, परन्तु वह पुनः नियुक्ति के पात्र होंगे। ग्राम सभा द्वारा सहायक सचिव को चुनते समय महिलाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
बहुमत से सहायक सचिव को कभी भी हटाना संभव

नियमों के अनुसार यदि संबंधित ग्राम पंचायत का सचिव ग्राम सभा की बैठक के अध्यक्ष के आदेशों का जो झारखंड पंचायती राज अधिनियम 2001 के अधीन दायित्वों के निर्वहन या क्रियान्वयन करने के क्रम में पंचायत सचिव के कृत्यों में आते हैं, उनका पालन नहीं करता है तो अध्यक्ष संबंधित पंचायत समिति के कार्यपालक पदाधिकारी से उसपर नियंत्रण करने की अपेक्षा कर सकती है।

दूसरी ओर, यदि राज्य सरकार अपने विवेक पर पंचायत के कार्यकलापों की जांच करती है, तब जांचकर्ता पदाधिकारी के समक्ष लिखित में अध्यक्ष समस्याओं का समाधान चाहने हेतु निवेदन कर सकता है और बता सकता है कि उसे अपने कर्तव्यों के पालन में अमूक बाधाएं हैं, जिनसे झारखण्ड पंचायती राज अधिनियम 2001 के उद्देश्यों के अनुकूल कार्य होने में समस्या आ रही है।

इसके उपरांत उक्त पदाधिकारी ऐसे संबंधित सारे कार्य के निष्पादन किये जाने का निर्देश दे सकेगा, जिसे पंचायत द्वारा नहीं किया जा रहा है तथा जिसका किया जाना लोकहित में आवश्यक है।

झारखंड पंचायती राज अधिनियम 2001 के अधीन पंचायतों के कार्य का निरीक्षण होने के समय लिखित में अध्यक्ष निरीक्षणकर्ता पदाधिकारी को ग्राम सभा संबंधी कठिनाइयां प्रस्तुत कर सकता है।
अभद्रता से पेश आने पर होगा एक्शन

बैठक में यदि कोई सदस्य अभद्रता से पेश आता है, आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग करता है और उन्हें वापस लेने या क्षमा मांगने से इनकार करता है तो वह सदस्य व्यवस्था भंग करने का दोषी होगा तथा अध्यक्ष द्वारा ऐसे किसी भी सदस्य को बैठक से तुरंत निकल जाने का निर्देश दे सकेगा और इस प्रकार निकल जाने के लिए आदेशित किया गया कोई सदस्य तुरन्त ऐसा करेगा और उस दिन की बैठक की शेष अवधि के दौरान अनुपस्थित रहेगा।
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