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जौनपुर जिला कारागार में नशे में धुत बंदी रक्षक डिप्टी जेलर से भिड़ा, हंगामे के बाद ल‍िखा डीआइजी जेल को पत्र

deltin33 2026-1-2 12:57:23 views 1043
  

जौनपुर जिला कारागार में एक बंदी रक्षक के नशे की हालत में डिप्टी जेलर से भिड़ने के मामले में कार्रवाई की जा रही है।



जागरण संवाददाता, जौनपुर। जिला कारागार में बुधवार की रात एक गंभीर घटना घटित हुई, जब नशे में धुत बंदी रक्षक डिप्टी जेलर से भिड़ गया। इस घटना ने जेल परिसर में हंगामे का माहौल पैदा कर दिया। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रभारी जेल अधीक्षक ने उच्च अधिकारियों को सूचित करते हुए डीआइजी जेल को पत्र लिखा है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

इस घटना की शुरुआत तब हुई जब डिप्टी जेलर सुषमा शुक्ला के सेवानिवृत्त होने पर विदाई समारोह का आयोजन किया गया था। इस अवसर पर शाम को एक पार्टी का आयोजन किया गया था। पार्टी के दौरान, नशे में धुत बंदी रक्षक अजीत कुमार वर्मा ने अचानक हंगामा खड़ा कर दिया। जब डिप्टी जेलर नंद किशोर गौतम ने उसे मना किया, तो वह उनसे भी भिड़ गया। अन्य सिपाही उसे रोकने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन वह किसी की बात सुनने को तैयार नहीं था।

जैसे-जैसे मामला बढ़ा, जेलर अजय कुमार भी मौके पर पहुंचे और स्थिति को शांत करने का प्रयास किया। लेकिन अजीत ने जेलर के साथ भी दुर्व्यवहार किया। इस स्थिति को देखते हुए जेल प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की और बंदी रक्षक को काबू में कर लिया। उसे जिला कारागार के एंबुलेंस से जिला अस्पताल ले जाकर उसका मेडिकल कराया गया।

मेडिकल जांच में यह पुष्टि हुई कि अजीत ने शराब पी रखी थी और गुटखा भी खाया था। इसके बाद, उच्चाधिकारियों को इस घटना की जानकारी दी गई और कार्रवाई के लिए डीआइजी जेल को पत्र लिखा गया। प्रभारी जेल अधीक्षक अजय कुमार ने बताया कि इस अनुशासनहीनता के मामले में उचित कार्रवाई के लिए उच्च अधिकारियों को सूचित किया गया है और डीआइजी जेल को पत्र भेजा गया है।

इस घटना ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। नशे में धुत बंदी रक्षक का इस तरह का व्यवहार न केवल अनुशासनहीनता है, बल्कि यह जेल के माहौल को भी प्रभावित करता है। जेल में सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, ताकि बंदियों और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

इस प्रकार की घटनाएं जेल प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण होती हैं, और इसे गंभीरता से लिया जाना चाहिए। उच्च अधिकारियों को इस मामले की जांच करनी चाहिए और यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों।

जेल में काम करने वाले कर्मचारियों को भी यह समझना चाहिए कि उनका व्यवहार और कार्यशैली न केवल उनके लिए, बल्कि पूरे जेल के लिए महत्वपूर्ण है। अनुशासनहीनता के मामले में सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि अन्य कर्मचारियों के लिए यह एक उदाहरण बने।

इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया है कि जेल प्रशासन को अपने कर्मचारियों की गतिविधियों पर नजर रखने की आवश्यकता है। नशे की लत और अनुशासनहीनता के मामलों को गंभीरता से लेना चाहिए, ताकि जेल का माहौल सुरक्षित और अनुशासित बना रहे।

इस प्रकार की घटनाएं समाज में एक नकारात्मक संदेश भेजती हैं और जेल प्रशासन की छवि को भी प्रभावित करती हैं। इसलिए, इस मामले में उचित कार्रवाई की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो सके। जिला कारागार में हुई इस घटना ने सभी को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या जेल में अनुशासन और सुरक्षा को बनाए रखना संभव है।
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