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बाल सुरक्षा पर सवाल: पश्चिमी सिंहभूम में 2025 में पोक्सो के 62 मामले, बाल अपराधों ने बढ़ाई चिंता

cy520520 2025-12-31 23:57:10 views 850
  

फाइल फोटो।


संवाद सहयोगी, चाईबासा । पश्चिमी सिंहभूम जिले में वर्ष 2025 के दौरान बाल अपराध और यौन उत्पीड़न से जुड़े मामलों ने समाज और प्रशासन दोनों को गंभीर चिंता में डाल दिया है। आंकड़े बताते हैं कि बीते एक साल में जिले में पोक्सो एक्ट के तहत 62 मामले दर्ज किए गए।    औसतन हर महीने पांच से अधिक पोक्सो मामले सामने आए, जो बाल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करते हैं। ये वे मामले हैं, जो थाने तक पहुंचे, जबकि सामाजिक दबाव, डर और बदनामी के कारण कई घटनाएं दर्ज ही नहीं हो पातीं।  

जिले में दर्ज सभी 62 पोक्सो मामलों में फिलहाल न्यायालय में सुनवाई की प्रक्रिया चल रही है। अधिकारियों का कहना है कि इन मामलों में त्वरित कार्रवाई की गई, लेकिन जांच के दौरान एक गंभीर तथ्य यह भी सामने आया कि अधिकांश मामलों में परिवार के सदस्य या करीबी रिश्तेदार ही आरोपी पाए गए।  विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें पश्चिमी सिंहभूम में वर्ष 2025 के दौरान चाइल्ड ट्रैफिकिंग के 60 मामले भी सामने आए। इन मामलों में बच्चों को दूसरे जिलों या राज्यों में ले जाने की घटनाएं शामिल हैं।    जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में आर्थिक लाभ के लिए बच्चों को परिवार के लोगों ने ही बाहर भेजा। बाल संरक्षण विभाग और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई से कई बच्चों को सुरक्षित वापस लाया गया।  

बाल विवाह के खिलाफ अभियान के तहत जिले में 26 बाल विवाह के मामलों की पहचान की गई। समय रहते काउंसिलिंग और प्रशासनिक हस्तक्षेप से इन सभी मामलों को रोका गया। इसके अलावा चाइल्ड लेबर के सात मामलों का भी निपटारा किया गया, जिनमें बच्चों को खतरनाक या अवैध श्रम से मुक्त कराया गया।

बाल संरक्षण विभाग की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में 65 अनाथ बच्चों को वात्सल्य योजना से जोड़ा गया, ताकि उनके पालन-पोषण और शिक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित की जा सके। वहीं चार ऐसे परिवार भी सामने आए, जो अपने बच्चों का पालन-पोषण करने में असमर्थ थे। इन परिवारों ने स्वयं बच्चों को बाल संरक्षण विभाग के सुपुर्द किया।

सबसे अधिक झकझोरने वाली घटनाएं वे रहीं, जिनमें सात नवजात बच्चों को जन्म के बाद झाड़ियों में फेंक दिया गया। इन अमानवीय घटनाओं के बाद सभी बच्चों को सुरक्षित रूप से बाल संरक्षण विभाग के संरक्षण में लिया गया।

इस संबंध में जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी पुनीता तिवारी ने बताया कि वर्ष 2025 में बाल अपराध और संरक्षण से जुड़े जितने भी मामले सामने आए, उन सभी पर नियमानुसार कार्रवाई की गई है। उन्होंने कहा कि समाज को भी ऐसे मामलों के प्रति संवेदनशील होना होगा, क्योंकि बच्चों की सुरक्षा केवल कानून से नहीं, बल्कि सामूहिक जागरूकता से ही संभव है।
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