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Bihar News: एमडीएम बीआरपी के ट्रांसफर में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी, जांच में हुआ भंडाफोड़

cy520520 2025-12-18 18:07:13 views 1039
  



जागरण संवाददाता, भागलपुर। शिक्षा विभाग में सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। एक निलंबित शिक्षिका को विशिष्ट प्रधानाध्यापक बना देने का मामला हो या बिना सक्षम प्राधिकारी के प्रखंड साधन सेवी का तबादला करने का मामला हो। एक के बाद एक गड़बड़झाला सामने आने से विभाग की कार्यशैली सवालों के घेरे में आ गई है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

दरअसल, क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक अहसन ने जांच में पाया कि जिले में पीएम पोषण योजना के तहत प्रखंड साधन सेवी के स्थानांतरण नियमों के विपरीत किया गया है। उन्होंने मामले में तत्कालीन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, पीएम पोषण योजना पवन कुमार द्वारा निर्गत स्थानांतरण आदेश पर गंभीर आपत्तियां दर्ज की हैं।

बिना सक्षम प्राधिकारी के अनुमोदन के ही स्थानांतरण आदेश जारी किया गया। क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक ने पूरे मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित स्थानांतरण आदेश को रद्द कर पुनः नियमानुसार कार्रवाई करने की सिफारिश जिला शिक्षा पदाधिकारी से की है।

जांच के दौरान कर्मी मो. मुजाहिद निसार ने स्पष्ट किया कि पीएम पोषण योजना से संबंधित पत्रों के निर्गमन और ई-मेल की जिम्मेदारी सामान्यतः उन्हीं के स्तर से निभाई जाती है।

उन्होंने बताया कि ज्ञापांक 1128 से संबंधित स्थानांतरण आदेश न तो उनके द्वारा निर्गत किया गया और न ही उनके माध्यम से किसी कार्यालय को ई-मेल किया गया। निर्गत पंजी के अवलोकन में भी यह पत्र उनके स्तर से जारी नहीं पाया गया। मुजाहिद के अनुसार अन्य सभी पत्र नियमित प्रक्रिया के तहत उन्हीं के द्वारा निर्गत और मेल किए जाते हैं, ऐसे में इस पत्र का अलग तरीके से जारी होना संदेह के घेरे में है।
चार प्रखंडों के बीआरपी का हुआ था स्थानांतरण का आदेश

मामला भागलपुर जिले के पीरपैंती, सुलतानगंज, नवगछिया और नारायणपुर प्रखंडों में कार्यरत प्रखंड साधन सेवी, पीएम पोषण योजना के स्थानांतरण से जुड़ा है। इन चारों कर्मियों ने तत्कालीन डीपीओ एमडीएम द्वारा ज्ञापांक 1128 दिनांक 26 नवंबर को जारी स्थानांतरण आदेश पर आपत्ति दर्ज कराई थी।

इसके बाद क्षेत्रीय शिक्षा उप निदेशक अहसन ने 11 दिसंबर को जिला कार्यक्रम पदाधिकारी कार्यालय में संचिका की जांच की थी। जांच में सामने आया कि स्थानांतरण आदेश जिला शिक्षा पदाधिकारी के अनुमोदन के बिना जारी किया गया था। जबकि नियमों के अनुसार यह आवश्यक है। साथ ही पाया गया कि वर्ष 2022 में हुए स्थानांतरण जिलाधिकारी के अनुमोदन के बाद किए गए थे।
रिटायर होने के बाद पत्र जारी किए जाने की आशंका

क्षेत्रीय शिक्षा उपनिदेशक ने जांच में यह आशंका भी जताई कि तत्कालीन जिला कार्यक्रम पदाधिकारी ने सेवानिवृत्त के बाद पूर्व तिथि में हस्ताक्षर कर आदेश जारी किया हो। साथ ही पूरे प्रकरण में जिला कार्यक्रम प्रबंधक की भूमिका को भी संदिग्ध बताया है।
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