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ट्रेनों की लेटलतीफी यात्रियों के लिए बनी टॉर्चर...8 घंटे का सफर 18 घंटे में बदला, खाना तो छोड़िए चाय के लिए भी तरस गए लोग

Chikheang 2025-12-17 12:37:10 views 1236
  

प्रतीकात्मक तस्वीर



जागरण संवाददाता, प्रयागराज। Indian railways running late नई दिल्ली से रात 10:10 बजे रवाना हुई प्रयागराज एक्सप्रेस ने यात्रियों की उम्मीदों को चूर-चूर कर दिया। यात्रियों को विश्वास था कि वे सुबह सात बजे तक अपने घर पहुंच जाएंगे, लेकिन घने कोहरे ने उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

यह आठ घंटे की यात्रा अठारह घंटे में बदल गई और ट्रेन शाम 4:22 बजे प्रयागराज जंक्शन पर पहुंची। कोहरे ने रेलवे के सभी बड़े दावों की पोल खोल दी। फॉग सेफ डिवाइस और एडवांस्ड सिग्नलिंग सिस्टम पूरी तरह बेकार साबित हुए। ट्रेन रेंगती हुई चली, कभी रुकती, कभी आगे बढ़ती।

यात्री अंदर कैद हो गए। सबसे बड़ी समस्या यह थी कि प्रयागराज एक्सप्रेस में पैंट्री कार नहीं थी। सुबह का नाश्ता तो दूर, चाय और बिस्किट के लिए भी लोग तरस गए। अपने बच्चों के साथ यात्रा कर रहीं सलोरी की डॉ. सुविता शुक्ला ने कहा, \“बड़ों का तो जैसे-तैसे गुजरा, लेकिन बच्चों के लिए यह सफर किसी बुरे सपने से कम नहीं था। भूख से वे रोते रहे। जो थोड़ा-बहुत घर से लेकर आए थे, वह भी कुछ ही घंटों में खत्म हो गया।\“

इसी ट्रेन में फूलपुर के अलोक कुमार मौर्य पत्नी और चार साल के बेटे के साथ सफर कर रहे थे। उनका गुस्सा अभी भी ठंडा नहीं हुआ है। वे कहते हैं, \“ट्रेन ऐसे लेट होती गई जैसे बीरबल की खिचड़ी पक रही हो। ऐप पर लोकेशन देखते रहते थे-पहले आठ बजे, फिर नौ, दस, ग्यारह... और अंत में साढ़े चार बज गए। रेलवे को सभी यात्रियों का पूरा किराया लौटाना चाहिए और माफी भी मांगनी चाहिए।\“

एक शिक्षिका रागिनी अपनी डेढ़ साल की बेटी को गोद में लिए पूरी यात्रा रोती रहीं। उन्होंने कहा, \“अगर ट्रेन इतनी देरी से चल रही है तो कम से कम खाने-पीने का इंतजाम तो होना चाहिए था। जिस समय हमें कानपुर पहुंचना था, उस समय हम अलीगढ़ पर ही थे।\“ जब ट्रेन कानपुर पहुंची तो यात्रियों ने प्लेटफार्म पर उतरकर बच्चों के लिए बिस्किट, ब्रेड और जूस खरीदा।

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प्रयागराज जंक्शन पर जब ट्रेन पहुंची, तो हर यात्री के चेहरे पर गुस्सा, थकान और निराशा साफ दिख रही थी। मंगलवार को कोहरे ने पूरे रेल नेटवर्क को प्रभावित किया। नई दिल्ली-वंदे भारत एक्सप्रेस दोपहर 12 बजे की बजाय शाम 4:45 बजे पहुंची।

आगरा वंदे भारत ढाई घंटे लेट रही। हमसफर एक्सप्रेस को लगभग दस घंटे की देरी झेलनी पड़ी। शिवगंगा एक्सप्रेस भी नौ घंटे से ज्यादा लेट रही। हावड़ा राजधानी करीब 14 घंटे, गरीब रथ 14 घंटे और तेजस राजधानी 13 घंटे देरी से आई। सबसे बुरी स्थिति दरभंगा-आनंद विहार स्पेशल ट्रेन की रही, जिसे 24 घंटे री-शेड्यूल किया गया और वह कुल 28 घंटे लेट होकर पहुंची।
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