Ekadashi 2026 Calendar: बेहद महत्वपूर्ण एकादशी तिथि
धर्म डेस्क, नई दिल्ली। सनातन धर्म में एकादशी तिथि को विशेष महत्व दिया गया है। इस दिन जगत के पालनहार भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना होती है। साथ ही विधिपूर्वक व्रत किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस व्रत को करने से साधक को भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है और जीवन में खुशियों का आगमन होता है। हर महीने में 2 बार एकादशी (Ekadashi dates 2026) व्रत किया जाता है। अब नए साल की शुरुआत होने जा रही हैं, तो ऐसे में चलिए जानते हैं कि नए साल का एकादशी (Ekadashi calendar 2026) कैलेंडर। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
| एकादशी 2026 डेट | एकादशी का नाम | | 14 जनवरी 2026 | षटतिला एकादशी | | 29 जनवरी 2026 | जया एकादशी | | 13 फररी 2026 | विजया एकादशी | | 27 फरवरी 2026 | आमलकी एकादशी | | 15 मार्च 2026 | पापमोचनी एकादशी | | 29 मार्च 2026 | कामदा एकादशी | | 13 अप्रैल 2026 |
वरूथिनी एकादशी | | 27 अप्रैल 2026 |
मोहिनी एकादशी | | 13 मई 2026 | अपरा एकादशी | | 27 मई 2026 | पद्मिनी एकादशी | | 11 जून 2026 | परम एकादशी | | 25 जून 2026 | निर्जला एकादशी | | 10 जुलाई 2026 | योगिनी एकादशी | | 25 जुलाई 2026 | देवशयनी एकादशी | | 09 अगस्त 2026 | कामिका एकादशी | | 23 अगस्त 2026 | श्रावण पुत्रदा एकादशी | | 07 सितंबर 2026 | अजा एकादशी | | 22 सितंबर 2026 | परिवर्तिनी एकादशी | | 06 अक्टूबर 2026 | इन्दिरा एकादशी | | 22 अक्टूबर 2026 | पापांकुशा एकादशी | | 05 नवंबर 2026 | रमा एकादशी | | 20 नवंबर 2026 | देवउठनी एकादशी | | 04 दिसंबर 2026 | उत्पन्ना एकादशी | | 20 दिसंबर 2026 | मोक्षदा एकादशी |
एकादशी व्रत का महत्व
एकादशी तिथि (Ekadashi fasting days) को भगवान विष्णु और मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, एकादशी व्रत और दान करने से साधक के जीवन में खुशियों का आगमन होता है। साथ ही सुख-समृद्धि में वृद्धि होती है। ऐसा माना जाता है कि जो जातक सच्चे मन से एकादशी व्रत करता है, उसे सभी पापों से छुटकारा मिलता है। इस व्रत में अन्न और चावल का सेवन नहीं किया जाता है। व्रत का पारण अगले दिन यानी द्वादशी तिथि पर किया जाता है। व्रत का पारण करने से साधक को व्रत का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
एकादशी व्रत के नियम
- व्रत के दौरान तामसिक भोजन का सेवन न करें
- काले रंग के कपड़े धारण न करें।
- वाद-विवाद न करें।
- किसी के बारे में न सोचें।
- घर और मंदिर की साफ-सफाई का ध्यान रखें।
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