LHC0088 • 2025-12-10 17:37:53 • views 1239
तापस बनर्जी, धनबाद। खदानों से होनेवाले गैस रिसाव के दौरान शुरुआती दौर में निकलने वाली गैस कार्बन मोनोआक्साइड ही है। सबसे खतरनाक और जानलेवा होने से इसे गैस नहीं बल्कि साइलेंट किलर कह सकते हैं। इसका महज 50 पीपीएम भी जान ले सकता है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
शरीर में प्रवेश करते ही यह गैस खून का थक्का बना देता है। समझने से पहले ही जान ले लेता है। यह कहना है केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान-सिंफर के सेवानिवृत्त विज्ञानी डा. डीडी त्रिपाठी का। माइन फायर के क्षेत्र में देश-विदेश में काम कर चुके डा. त्रिपाठी ने दैनिक जागरण से बातचीत में कहा कि खदानों से निकलने वाली अन्य गैस धीरे-धीरे असर करती है।
कार्बन मोनोआक्साइड तेजी से रिएक्ट करता है। इस गैस को डाइल्यूट करने के लिए नाइट्रोजन फीलिंग कारगर उपाय है। इससे कार्बन मोनो आक्साइड की मात्रा को काबू किया जा सकता है। प्रभावित स्थल के आसपास दरार या गोफ बन गया हो और उसे आक्सीजन मिल रहा हो जिससे आग बढ़ने की संभावना है। वैसी स्थिति में नाइट्रोजन फीलिंग बेहतर विकल्प है।
केंदुआ में जहरीली गैस के हॉट स्पॉट ढूंढ़ रहे सिंफर विज्ञानी
- गैस के प्रभाव कम करने को डाली जा रही मिट्टी की ऊपरी परत, मात्रा कम करने का भी तलाशा जा रहा विकल्प
- बीसीसीएल गेस्ट हाउस की चहारदीवारी से सटे धनबाद-केंदुआ मुख्य मार्ग व अन्य प्रभावित स्थल की कर रहे मापी
- तापमान और गैस मापक यंत्र लेकर उतरी सिंफर विज्ञानियों की तीन सदस्यीय टीम, एक सप्ताह में चलेगी जांच
केंदुआ में जहरीली गैस कांड को लेकर अब केंद्रीय खनन एवं ईंधन अनुसंधान संस्थान-सिंफर विज्ञानियों की टीम भी उतर गई है। मंगलवार से सिंफर विज्ञानियों ने जहरीली गैस के हाट स्पाट की तलाश शुरू कर दी।
सिंफर के मुख्य विज्ञानी डा. संतोष कुमार राय के नेतृत्व में तीन सदस्यीय टीम तापमान मापक व गैस मापक यंत्र के साथ बीसीसीएल गेस्ट हाउस, गेस्ट हाउस की चहारदीवारी से सटे धनबाद-केंदुआ मुख्य मार्ग, नया धौड़ा समेत अन्य प्रभावित स्थल व आसपास जांच कर रही है। मिट्टी की ऊपरी परतों की कटाई कर गड्ढे भरे जा रहे हैं। गैस की मात्रा कम करने का प्रयास किया जा रहा है। विज्ञानी अगले एक सप्ताह में विस्तृत जांच कर रिपोर्ट तैयार करेंगे। |
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