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तिरुपति मंदिर में 10 साल तक चढ़ाए गए सिल्क की जगह पॉलिएस्टर के दुपट्टे, लड्डू के बाद हुआ एक और घोटाला

Chikheang 2025-12-10 17:07:21 views 904
  

तिरुपति मंदिर में लड्डू के बाद हुआ एक और घोटाला



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आंध्र प्रदेश के तिरुमला तिरुपति देवस्थानम मंदिर में लड्डू घोटाले के बाद अब एक और बड़ा घोटाला सामने आया है। ट्रंस्ट का आरोप है कि 2015 से 2025 तक भक्तों-दानदाताओं को दिए जाने वाले पवित्र रेशमी (सिल्क) दुपट्टे असल में 100% पॉलिएस्टर के थे। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

दरअसल, लड्डू विवाद और परकमानी मामले के अलावा, प्रसिद्ध तिरुमाला मंदिर का संचालन करने वाले ट्रस्ट ने अब आरोप लगाया है कि पिछले एक दशक में रेशमी दुपट्टे बेचने वाली एक फर्म ने उन्हें करोड़ों रुपये का चूना लगाया है।
55 करोड़ की धोखाधड़ी

नियम के अनुसार, हर दुपट्टे में शुद्ध शहतूत रेशम और रेशम होलोग्राम होना अनिवार्य था, लेकिन सप्लायर ने सस्ता पॉलिएस्टर थोपकर करीब 55 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। फर्म ने शुद्ध शहतूत रेशम के बजाय, 2015 से 2025 तक तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) को 100% पॉलिएस्टर के दुपट्टे बेचे।
जांच में हुआ खुलासा

TTD चेयरमैन बीआर नायडू की अध्यक्षता में बोर्ड ने पूरा मामला आंध्र प्रदेश एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) को सौंप दिया है। दुपट्टे की जांच के लिए गोदाम और मंदिर परिसर से सैंपल लिए। इसके बाद बेंगलुरु व धर्मवरम की सेंट्रल सिल्क बोर्ड लैब में टेस्ट कराया गया। जांच के दौरान दोनों ही रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है कि सारे दुपट्टे पॉलिएस्टर के हैं।
15,000 नए दुपट्टों के ठेके पर रोक

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में दुपट्टा सप्लायर नागरी की VRS एक्सपोर्ट्स को अभी-अभी 15,000 और दुपट्टों का नया ठेका भी दिया गया था। अब उस ठेके पर भी रोक लग गई है। बोर्ड ने मामले की जांच एंटी-करप्शन ब्यूरो को सौंपते हुए कथित धोखाधड़ी के पीछे के लोगों की पहचान करने को कहा है।

बता दें कि तिरुमाला मंदिर के भीतर वीआईपी दर्शन के दौरान रंगनायकुला मंडपम में वेदासिरवाचनम के समय टीटीडी दानदाताओं और अन्य श्रद्धालुओं को रेशमी दुपट्टे भेंट किया जाता है। पुरोहित दानदाताओं और वीआईपी दर्शन टिकट खरीदने वालों का अभिनंदन करते हैं।
क्या है दुपट्टे का मानक

मंदिर के नियमों के अनुसार, दुपट्टे पूरी तरह से शुद्ध शहतूत रेशम से बुने होने चाहिए और ताने और बाने दोनों में 20/22 डेनियर के धागे का प्रयोग होना चाहिए, जिससे दुपट्टों की न्यूनतम मोटाई 31.5 डेनियर हो। प्रत्येक वस्तु पर एक ओर संस्कृत में और दूसरी ओर तेलुगु में \“ॐ नमो वेंकटेशाय\“ लिखा होना चाहिए, साथ ही शंकु, चक्र और नमम् के प्रतीक भी होने चाहिए। दुपट्टे का आकार, वजन और बॉर्डर डिजाइन भी स्पष्ट रूप से तो परिभाषित हैं, लेकिन जांच के दौरान खुलासा हुआ है कि फर्म ने सस्ते पॉलिएस्टर की आपूर्ति करके मंदिर ट्रस्ट को धोखा दिया है।

यह भी पढ़ें- तिरुपति मंदिर लड्डू घोटाला: 68 लाख किलो नकली घी में बना प्रसाद, क्या है 250 करोड़ का स्कैम?
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