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हामिद अली हत्याकांड का खुलासा: दिल्ली से एटा तक साजिश, एक गिरफ्तार

cy520520 2025-12-10 14:37:40 views 776
  

सांकेतिक तस्वीर।



जागरण संवाददाता, एटा। प्रॉपर्टी डीलर हामिद अली उर्फ पप्पू हत्याकांड का पर्दाफाश कर दिया। हत्या की योजना दिल्ली में बनी थी, अंजाम एटा में दिया गया। जीआरपी ने एक आरोपित को गिरफ्तार किया है जो हामिद के बड़े भाई के साले का दोस्त है। साले और पकड़े गए आरोपित की दोस्ती तिहाड़ जेल में हुई थी। हालांकि मुख्य आरोपित साला अभी पुलिस की पकड़ से दूर है, मगर पकड़े गए उसके दोस्त ने घटना कबूली है। पुलिस ने पिस्टल भी बरामद की है। अब साले की तलाश की जा रही है। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें
बड़े भाई के साले ने दिया हत्याकांड को अंजाम, तलाश

आठ नवंबर की शाम सभासद कफील अहमद के छोटे भाई हामिद अली की रेलवे स्टेशन के पास दो गोली मारकर हत्या कर दी गई थी और शव को रेलवे यार्ड में फेंक दिया था। मामले की रिपोर्ट जीआरपी थाने में दर्ज कराई गई थी। इस मामले को लेकर पुलिस के ऊपर पर्दाफाश के लिए निरंतर दबाव बना हुआ था। पुलिस ने इस सिलसिले में शहर से ही सोमवार को दिल्ली के त्रिलोकपुरी के रहने वाले गजानंद पिप्पल की गिरफ्तारी की है।
पकड़े गए आरोपित से तिहाड़ जेल में साले की हुई थी दोस्ती, खुल सकते हैं और नाम

  

कफील अहमद का साला खालिद है, जिसने हत्याकांड की योजना बनाई। इस योजना में पिप्पल को शामिल कर लिया। दोनों में दोस्ती पिछले वर्षों तिहाड़ जेल में हुई थी। खालिद और पिप्पल पर कई मुकदमे दिल्ली में दर्ज हैं। एसओ जीआरपी जितेंद्र कुमार ने बताया कि पूछताछ में पिप्पल ने कबूला है कि खालिद और हामिद में दिल्ली में कहासुनी हुई थी, जिसकी वजह यह रही कि हामिद ने कफील की बेटी की शादी जयपुर में कराई थी, लेकिन इस रिश्ते से खालिद नाराज था। इसी बात को लेकर हामिद से घटना से कुछ दिन पहले कहासुनी हुई थी। खालिद भागा हुआ है, उसकी तलाश की जा रही है।


शुरू से ही घूम रही थी शक की सुई


  

हत्या के बाद से ही यह माना जा रहा था कि हामिद को मारने वाला कोई अति नजदीकी ही है। दैनिक जागरण ने कई बार इस तथ्य को प्रमुखता से प्रकाशित किया। जो सच साबित हुआ। पुलिस ने शुरू से ही नजदीकियों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया था। पूछताछ के लिए कई लोगों को हिरासत में लिया गया।

हत्या के समय हामिद कम से कम आठ लाख रुपये के सोने के गहने पहने हुए थे। आरोपितों ने उनके गहने नहीं लूटे। वहीं से पुलिस को लाइन मिल गई कि वारदात किसी नजदीकी ने ही की है। आरोपित 15 दिन से रेकी कर रहे थे। पुलिस ने सीडीआर और सीसीटीवी फुटेज खंगाले, जिससे आरोपित तक पहुंचने में मदद मिली। जीआरपी का अभी यह मानना है कि अभी कुछ नाम और सामने आ सकते हैं।

मुस्लिम समाज के लोग एसओ से मिले


मुस्लिम समाज के लोग जीआरपी एसओ जितेंद्र कुमार से मिले और पर्दाफाश के लिए आभार जताया। समाज के लोगों का कहना है कि पुलिस ने संकेत दिए हैं कि कुछ नाम और भी हैं जो विवेचना के दौरान सामने आ सकते हैं। खालिद की गिरफ्तारी से बहुत कुछ खुलेगा।
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