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जेजे अस्पताल शूटआउट मामले में अदालत ने खारिज की आरोपित की याचिका, कोर्ट ने क्या कहा?

Chikheang 2025-11-4 04:07:07 views 1155
  

जेजे हॉस्पिटल शूटआउट केस में सुनवाई।  



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मुंबई की विशेष मकोका अदालत ने 1992 के जेजे अस्पताल गोलीबारी मामले में एक आरोपित की आरोपमुक्ति याचिका खारिज कर दी है। अदालत ने कहा कि अपराध में उसकी संलिप्तता दिखाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य है। महाराष्ट्र सरकार द्वारा संचालित जेजे अस्पताल में 12 सितम्बर 1992 को हुई गोलीबारी में तीन लोगों की मौत हो गई थी। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

गौरतलब है कि किसी आपराधिक मामले में आरोपपत्र दाखिल होने के बाद, लेकिन संबंधित अदालत द्वारा आरोपित के खिलाफ आरोप तय किए जाने से पहले आरोपमुक्ति याचिका दायर की जा सकती है। इस कानूनी उपाय के तहत यदि अदालत को दिए गए साक्ष्य प्रथम दृष्टया अपराध साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं होते हैं, तो आरोपित आरोपमुक्त होने का हकदार होता है।
पारित आदेश में क्या कहा गया?

महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (मकोका) अदालत के विशेष न्यायाधीश महेश जाधव ने एक नवंबर को पारित आदेश में कहा कि प्रथम दृष्टया साक्ष्यों से स्पष्ट रूप से पता चलता है कि आरोपित षड्यंत्र, हत्या में सहायता, अपराध सिंडिकेट की आपराधिक गतिविधि को बढ़ावा देने में शामिल था।
त्रिभुवन सिंह को किया गया था गिरफ्तार

मुंबई स्थित महाराष्ट्र सरकार द्वारा संचालित अस्पताल में गोलीबारी के 32 साल बाद आरोपित त्रिभुवन सिंह उर्फ श्रीकांत राय रामपति को 2024 में गिरफ्तार किया गया था। इस मामले में गिरफ्तारी से पहले त्रिभुवन उत्तर प्रदेश की एक जेल में अंडरट्रायल कैदी था।

त्रिभुवन के वकील सुदीप पासबोला ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल के खिलाफ आरोप तय करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। हालांकि अदालत ने कहा, अभियोजन पक्ष द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य यह मानने के लिए पर्याप्त है कि इस मामले में अभियुक्तों के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए पर्याप्त आधार हैं।
पुलिस ने क्या बताया?

पुलिस के अनुसार, एके-47, पिस्तौल, रिवाल्वर और हथगोले जैसे घातक हथियारों से लैस हमलावर आतंक फैलाने के इरादे से जेजे अस्पताल में घुसे और अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी थी। गोलीबारी में गैंग्सस्टर शैलेश हल्दांकर और दो पुलिसकर्मी मारे गए, जबकि एक कांस्टेबल और कुछ अस्पताल कर्मचारी घायल हो गए।

जांच से पता चला कि अस्पताल में हुई गोलीबारी अंडरव‌र्ल्ड डॉन अरुण गवली और दाऊद इब्राहिम के गिरोहों के बीच लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी का नतीजा थी।

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