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हरियाणा में CM सैनी का बड़ा एलान, राज्य में 1.80 लाख युवाओं को बिना सिफारिश मिली नौकरी

Chikheang 2025-10-28 18:49:10 views 501
  

हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी



जागरण संवाददाता, रोहतक। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी बुधवार को रोहतक में बाबा मस्तनाथ विश्वविद्यालय, अस्थल बोहर के चौथे दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि पहुंचे। इस दौरान उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि राज्य के सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को इंडस्ट्री-एकेडमी पार्टनरशिप को अपनाना होगा। इस दिशा में हमने तकनीकी संस्थानों में प्लेसमेंट के लिए 580 से अधिक उद्योगों से समझौते किये हैं। विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत प्रदेश में ऐसे शिक्षण संस्थान तैयार किए जा रहे हैं, जिनमें केजी कक्षा से पीजी कक्षा तक की शिक्षा प्रदान की जाएगी। कई विश्वविद्यालयों में केजी से पीजी स्कीम के तहत दाखिले किये गए हैं। बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्ण लाल पंवार, शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति महंत बालक नाथ योगी भी उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को पदक व उपाधियां प्रदान की।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में ऐसे सुधारों पर बल दे रही है, जिनसे युवाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ-साथ रोजगार के अवसर भी मिलें और वे समाज और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभा सकें। प्रदेश सरकार ने बिना पर्ची-खर्ची के अब तक 1.80 लाख युवाओं को योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरियां दी हैं और तीसरे कार्यकाल में 2 लाख नौकरियों का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने युवाओं से आह्वान किया कि वे प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कड़ी मेहनत करते रहे, उनकी मेहनत अवश्य रंग लाएगी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का सपना है कि हमारी भावी पीढ़ी को ऐसी शिक्षा मिले, जो उन्हें रोजगार सक्षम बनाए, चरित्रवान बनाए और उनमें नैतिक गुणों का समावेश करे। इसके लिए उन्होंने देश में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की है। हरियाणा देश का पहला राज्य है, जिसने अपने सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति को वर्ष 2024 में लागू कर दिया है। हरियाणा सरकार का लक्ष्य है कि हर विद्यार्थी को गुणवत्तापरक शिक्षा के साथ रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण भी मिले। इस दिशा में शिक्षा को कौशल विकास से जोड़ने के लिए स्कूलों में एनएसक्यूएफ, कॉलेजों में ‘पहल योजना’, विश्वविद्यालयों में इन्क्यूबेशन सेंटर और तकनीकी संस्थानों में उद्योगों के साथ एमओयू जैसे ठोस प्रयास किए गए हैं।
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