नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करने और भाव स्थिर रखने के लिए सितंबर माह तक चीनी के निर्यात पर अस्थायी रोक लगा दी है। इस नीतिगत फैसले को चीनी उद्योग और व्यापारियों ने सराहा है।
यूपी के सीतापुर जिले में बिसवां चीनी मिल समिति के चेयरमैन सुधाकर शुक्ला ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत करते हुए कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील के अनुरूप यह निर्णय लिया गया है। पूरा विश्व आर्थिक संकट और युद्ध जैसी स्थितियों से गुजर रहा है। ऐसे में हमें अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। चीनी निर्यात पर रोक लगाकर हम एथेनॉल उत्पादन बढ़ा सकते हैं, जिससे पेट्रोल और डीजल की खपत कम होगी। सभी नागरिकों, व्यापारियों और नौकरी-पेशा वालों से निवेदन है कि वे भी इस राष्ट्रहित के अभियान में सहयोग करें। अनावश्यक वाहन प्रयोग कम करें और जहां जरूरी न हो, वहां सोना न खरीदें।"
राजस्थान के श्रीगंगानगर की गुड शुगर मर्चेंट्स एसोसिएशन के संयुक्त सचिव कमल मिड्ढा ने सरकार के इस कदम को सराहनीय बताया। उन्होंने कहा, "इस फैसले से चीनी की कीमत स्थिर रहेगी। गरीब जनता के लिए चीनी खरीदना आसान रहेगा।"
एसोसिएशन के उपाध्यक्ष सीताराम गोयल ने कहा कि बरसात के मौसम में मांग कम होने के बावजूद भाव नियंत्रित रहेंगे। पश्चिम एशिया में तनाव को देखते हुए चीनी निर्यात पर लगाई गई इस रोक का स्वागत करते हुए अध्यक्ष कालीचरण अग्रवाल ने कहा, "आम उपभोक्ताओं को चीनी सस्ती मिलेगी। त्योहारी सीजन में दाम नहीं बढ़ेंगे, जिससे हर वर्ग को फायदा होगा।"
बिहार के बगहा के गन्ना संगठन के सदस्य दयाशंकर सिंह ने फैसले को दूरदर्शी बताया। उन्होंने कहा, "13 मई को केंद्र सरकार ने यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। वर्तमान में विश्व स्तर पर युद्ध और आपदा जैसी स्थितियां हैं। हमारे यहां 140 करोड़ जनसंख्या है और उत्पादन से ज्यादा खपत है। इस साल मौसम भी गन्ने की फसल के अनुकूल नहीं है। ऐसे में निर्यात पर रोक लगानी जरूरी थी, ताकि भविष्य में चीनी का आयात न करना पड़े। यह दीर्घकालिक सोच का फैसला है।"
सीकर से सुरेश अग्रवाल ने कहा, "केंद्र सरकार ने 4 महीने के लिए भारत से चीनी निर्यात पर प्रतिबंध लगाया है। इसके कारण पूरे उत्पादन का प्रयोग भारत की जनता करेगी। इसका सीधा फायदा आम आदमी को मिलेगा। निर्यात नहीं होने से चीनी का भाव कम होगा और लोगों को इसका फायदा होगा। केंद्र सरकार चाहती है कि देश का उत्पादन देश के अंदर ही काम आए। केंद्र सरकार ने बिल्कुल सही निर्णय लिया है।"
एक अन्य व्यापारी ने कहा, "सरकार ने पहले चीनी एक्सपोर्ट करने का निर्णय लिया था। 10 लाख टन चीनी निर्यात की बात कही थी, जिसमें से 8 लाख टन पूरा भी हो चुका है। अब सरकार ने चीनी निर्यात में रोक लगा दी है, जिससे इसकी कीमतें स्थिर हो जाएंगी। जब चीनी आसानी से मिलेगी तो इसके भाव नहीं बढ़ेंगे और जनता को सीधा इसका फायदा होगा। अभी देश में चीनी की कोई किल्लत नहीं है।"
सरकार का मानना है कि घरेलू जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को बढ़ावा देना है। इससे पेट्रोल-डीजल के आयात बिल में कमी आएगी और विदेशी मुद्रा भंडार बचेगा। चीनी मिलों को भी अब एथेनॉल उत्पादन पर ध्यान केंद्रित करने का मौका मिलेगा।

Deshbandhu
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