आबूधाबी/तेहरान। Iran UAE Tensions: मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) पर बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और ड्रोन से नया हमला किया है। हमले के बाद यूएई के एयर डिफेंस सिस्टम तुरंत सक्रिय हो गए और कई मिसाइलों व ड्रोन को हवा में ही नष्ट करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई। यूएई की नेशनल इमरजेंसी क्राइसिस एंड डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की है। अथॉरिटी ने कहा कि लोग सुरक्षित स्थानों पर रहें और केवल सरकारी एजेंसियों द्वारा जारी आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। देश के कई हिस्सों में विस्फोट जैसी आवाजें सुनाई देने के बाद लोगों में चिंता बढ़ गई। यूएई के रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ये आवाजें एयर डिफेंस सिस्टम द्वारा मिसाइलों और ड्रोन को रोकने की कार्रवाई के कारण सुनाई दे रही हैं।
अमेरिका-ईरान तनाव के बीच बढ़ी चिंता
यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब कुछ ही समय पहले अमेरिका और ईरान के बीच भी तनावपूर्ण हालात देखने को मिले थे। एक रात पहले दोनों देशों के बीच मिसाइलों को लेकर टकराव की खबरें सामने आई थीं। हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच 8 अप्रैल को संघर्ष विराम (सीजफायर) लागू हुआ था और लगभग 30 दिनों तक स्थिति अपेक्षाकृत शांत रही, लेकिन अब फिर से क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ती नजर आ रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे सैन्य तनाव का असर वैश्विक राजनीति और तेल बाजार पर भी पड़ सकता है। यूएई जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश पर हमला होने से अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता और बढ़ गई है।
पहले भी हो चुका है हमला
इससे पहले सोमवार को भी ईरान द्वारा यूएई पर मिसाइल और ड्रोन हमला किए जाने की खबरें सामने आई थीं। उस हमले में कथित तौर पर 15 मिसाइल और 4 ड्रोन का इस्तेमाल किया गया था। उस घटना के बाद दुनिया के कई देशों ने प्रतिक्रिया दी थी। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत कई वैश्विक नेताओं ने यूएई पर हुए हमले की निंदा की थी और क्षेत्र में शांति बनाए रखने की अपील की थी। लगातार हो रहे हमलों के कारण यूएई ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत कर दी है। देश के अहम ठिकानों, तेल प्रतिष्ठानों और रणनीतिक इमारतों के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा तैनात की गई है।
हमलों के सबूत जुटाने के लिए बनी नई कमेटी
ईरान के हमलों से हुए नुकसान का रिकॉर्ड तैयार करने के लिए यूएई सरकार ने एक विशेष कमेटी का गठन किया है। इस कमेटी का उद्देश्य हमलों में हुए जान-माल के नुकसान, तकनीकी प्रमाणों और अन्य सबूतों को इकट्ठा करना है। सरकारी समाचार एजेंसी WAM के मुताबिक, इस कमेटी की अगुवाई यूएई के अटॉर्नी जनरल करेंगे। इसमें विभिन्न मंत्रालयों और सरकारी एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया है। जरूरत पड़ने पर विदेशी विशेषज्ञों की मदद भी ली जाएगी। कमेटी हमलों से जुड़े फोटो, वीडियो, तकनीकी रिपोर्ट, क्षतिग्रस्त स्थलों के रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज जुटाएगी। बाद में इन्हीं प्रमाणों के आधार पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कानूनी कार्रवाई और मुआवजे की मांग की जा सकती है।
2000 से ज्यादा ड्रोन दागने का दावा
यूएई का दावा है कि हालिया संघर्ष के दौरान ईरान ने 2000 से ज्यादा ड्रोन, सैकड़ों बैलिस्टिक मिसाइल और कई क्रूज मिसाइल दागीं। हालांकि यूएई के एयर डिफेंस सिस्टम ने अधिकतर हमलों को नाकाम कर दिया, लेकिन कुछ हमलों में नुकसान भी हुआ। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन हमलों में कम से कम 13 लोगों की मौत हुई है, जबकि 200 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा कई तेल प्रतिष्ठानों, ऊर्जा केंद्रों और महत्वपूर्ण इमारतों को नुकसान पहुंचा है। यूएई प्रशासन का कहना है कि सुरक्षा एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं और किसी भी नए खतरे का जवाब देने के लिए तैयार हैं।
नागरिकों को सतर्क रहने की सलाह
यूएई की नेशनल इमरजेंसी क्राइसिस एंड डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी ने लोगों से अफवाहों से बचने और आधिकारिक निर्देशों का पालन करने की अपील की है। अथॉरिटी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी बयान में कहा कि देश के एयर डिफेंस सिस्टम पूरी क्षमता के साथ काम कर रहे हैं। लोगों को सलाह दी गई है कि वे भीड़भाड़ वाले इलाकों से बचें और सुरक्षा एजेंसियों द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। सरकार ने यह भी कहा कि मौजूदा स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सभी सुरक्षा संस्थाएं मिलकर काम कर रही हैं और देश की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।
ईरान से जवाबदेही और मुआवजे की तैयारी
यूएई पहले भी ईरान से हमलों की जिम्मेदारी लेने और हुए नुकसान की भरपाई की मांग कर चुका है। अब नई कमेटी के जरिए हमलों से जुड़ी हर जानकारी और सबूत व्यवस्थित रूप से तैयार किए जाएंगे ताकि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत आगे की कार्रवाई की जा सके। यूएई विदेश मंत्रालय ने कहा है कि किसी भी देश के साथ रक्षा सहयोग करना उसका संप्रभु अधिकार है। मंत्रालय ने ईरान के उन बयानों पर भी नाराजगी जताई, जिनमें अमेरिका और यूएई के रक्षा सहयोग को ईरान की सुरक्षा के खिलाफ बताया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, कमेटी द्वारा तैयार की जाने वाली विस्तृत फाइल का इस्तेमाल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर किया जाएगा। यूएई का उद्देश्य न केवल नुकसान का आकलन करना है, बल्कि भविष्य में इस तरह के हमलों के खिलाफ मजबूत कानूनी आधार भी तैयार करना है। मध्य पूर्व में बढ़ते इस तनाव ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है और आने वाले दिनों में क्षेत्रीय हालात किस दिशा में जाएंगे, इस पर सभी की नजर बनी हुई है।

Editorial Team
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