वाशिंगटन। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिकी सेना की कार्रवाई बहुत अच्छी तरह चल रही है। उनका कहना है कि ईरान की ताकत काफी हद तक खत्म हो चुकी है और उसे किसी भी हालत में परमाणु हथियार बनाने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
नेशनल स्मॉल बिजनेस वीक के मौके पर व्हाइट हाउस में बोलते हुए, ट्रंप ने कहा कि यह ऑपरेशन एक बड़े खतरे को रोकने के लिए जरूरी था। उन्होंने कहा, "हम ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दे सकते।"
ट्रंप के मुताबिक, ईरान की सैन्य व्यवस्था बुरी तरह कमजोर हो चुकी है। उन्होंने कहा कि ईरान के पास अब न नौसेना बची है, न वायुसेना, न हवाई हमलों से बचाव के साधन, न रडार- यानि उसकी रक्षा क्षमता लगभग खत्म हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के शीर्ष नेता भी अब प्रभावी स्थिति में नहीं हैं और नेतृत्व कमजोर हो गया है।
ट्रंप ने इस अभियान को सीमित लेकिन असरदार बताया। उन्होंने कहा, "मैं इसे एक 'मिनी वॉर' (छोटा युद्ध) कहता हूं," और इस बात पर ज़ोर दिया कि अमेरिकी सेना अपने लक्ष्य हासिल कर रही है। ट्रंप ने इस कार्रवाई की आलोचना और कम जनसमर्थन के दावों को भी खारिज किया। उनका कहना था कि अगर लोगों को पूरी बात समझाई जाए, तो समर्थन ज्यादा होगा।
ट्रंप ने कहा, "उन्होंने कहा कि सिर्फ़ 32 प्रतिशत लोग इसे पसंद करते हैं... लेकिन जब आप उन्हें इसके बारे में समझाते हैं... तो यह आंकड़ा 32 प्रतिशत नहीं रहता।" उन्होंने अमेरिकी सेना की ताकत पर भी जोर दिया और कहा कि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे मजबूत सेना है।
ट्रंप ने इस संघर्ष को तेल बाजार से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि पहले तेल की कीमतें बहुत बढ़ने की आशंका थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ और कीमतें नियंत्रण में हैं, बल्कि आगे और कम हो सकती हैं। उन्होंने कहा, "उन्हें लगा था कि ऊर्जा की कीमतें 300 डॉलर तक पहुंच जाएंगी... लेकिन अभी यह 100 डॉलर के आस-पास है... और मुझे लगता है कि यह और नीचे जाएगी।"
ट्रंप ने संकेत दिया कि सप्लाई की दिक्कतें कम हो रही हैं और हालात सामान्य होने पर तेल की कीमतें और गिर सकती हैं। सैन्य कार्रवाई के बावजूद ट्रंप ने कहा कि अमेरिका का शेयर बाजार मजबूत बना हुआ है और इस दौरान भी नए उच्च स्तर पर पहुंचा है।

Deshbandhu
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