वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक अहम और चौंकाने वाला फैसला लेते हुए अमेरिकी नौसेना के सचिव जॉन फेलन को उनके पद से तुरंत प्रभाव से हटा दिया है। यह कदम ऐसे समय में उठाया गया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है और होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नौसेना की सक्रिय तैनाती जारी है। इस फैसले ने पेंटागन और वॉशिंगटन के रणनीतिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है।
पेंटागन की ओर से जारी एक संक्षिप्त बयान में कहा गया कि जॉन फेलन ने तत्काल प्रभाव से पद छोड़ दिया है, लेकिन उनकी बर्खास्तगी के पीछे की स्पष्ट वजह नहीं बताई गई। हालांकि, कई मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिकी नौसेना की नाकाबंदी को पूरी तरह सफल न बना पाना भी इस फैसले की एक बड़ी वजह हो सकता है।
धीमी प्रगति पर सवाल
सूत्रों के मुताबिक, फेलन की कार्यशैली को लेकर लंबे समय से असंतोष बना हुआ था। खासतौर पर नौसेना के जहाज निर्माण कार्यक्रम में सुधार को लेकर उनकी धीमी प्रगति पर सवाल उठ रहे थे। ट्रंप प्रशासन इस क्षेत्र में तेजी से बदलाव चाहता था, लेकिन फेलन अपेक्षित गति से सुधार लागू नहीं कर पा रहे थे। इसके अलावा उनका तालमेल रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, डिप्टी रक्षा मंत्री स्टीव फाइनबर्ग और नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी हंग काओ के साथ भी अच्छा नहीं बताया जा रहा था। इसी पृष्ठभूमि में हंग काओ को अस्थायी तौर पर नौसेना सचिव की जिम्मेदारी सौंप दी गई है। काओ को एक सख्त और परिणाम-उन्मुख अधिकारी माना जाता है, जिससे प्रशासन को उम्मीद है कि वे मौजूदा चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकेंगे।
कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवाल
रिपोर्ट्स यह भी संकेत देती हैं कि जॉन फेलन के खिलाफ चल रही एक एथिक्स जांच ने उनकी स्थिति को और कमजोर कर दिया था। उनके दफ्तर की कार्यप्रणाली को लेकर उठे सवालों ने प्रशासन की चिंता बढ़ाई। साथ ही, फेलन और रक्षा मंत्री हेगसेथ के बीच कई महीनों से मतभेद चल रहे थे। हेगसेथ को लगता था कि फेलन निर्णय लेने में धीमे हैं और कई बार स्थापित प्रक्रियाओं को दरकिनार कर सीधे राष्ट्रपति ट्रंप से संपर्क करते हैं।
व्हाइट हाउस में हुई एक अहम बैठक के बाद स्थिति निर्णायक मोड़ पर पहुंच गई। ट्रंप पहले से ही नौसेना के कामकाज की गति से नाराज बताए जा रहे थे। उन्होंने रक्षा मंत्री को निर्देश दिया कि मामले को जल्द सुलझाया जाए। इसके बाद फेलन के सामने इस्तीफा देने या बर्खास्तगी का विकल्प रखा गया। अंततः ट्रंप ने खुद उनके पद से हटाए जाने की पुष्टि कर दी।
31 जहाजों को वापस भेजा
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका की रणनीतिक सक्रियता बढ़ी हुई है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ समुद्री नाकाबंदी लागू कर रखी है, जिसके तहत कई जहाजों की आवाजाही पर नजर रखी जा रही है। अमेरिकी नौसेना अब तक 31 जहाजों को वापस भेज चुकी है और दो जहाजों को अपने नियंत्रण में भी लिया है। हालांकि, कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, कई जहाज इस नाकाबंदी को पार करने में सफल भी रहे हैं, जिसने इस अभियान की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं।
पहली बड़ी कार्रवाई
जॉन फेलन का प्रोफाइल भी इस फैसले के संदर्भ में चर्चा में है। वे मूल रूप से एक बड़े कारोबारी रहे हैं और उनके पास सैन्य अनुभव नहीं था। उन्हें 2025 में इस पद पर नियुक्त किया गया था और वे ट्रंप के करीबी माने जाते थे। ऐसे में उनकी बर्खास्तगी को ट्रंप प्रशासन के भीतर बदलती प्राथमिकताओं और सख्त रुख का संकेत माना जा रहा है। यह ट्रंप के मौजूदा कार्यकाल में किसी बड़े रक्षा अधिकारी के खिलाफ पहली बड़ी कार्रवाई भी है।
पेंटागन में कई बड़े बदलाव
गौरतलब है कि हाल के दिनों में पेंटागन में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। इससे पहले आर्मी चीफ ऑफ स्टाफ रैंडी जॉर्ज को भी बिना स्पष्ट कारण बताए पद से हटा दिया गया था। इसके अलावा जनरल डेविड हॉडने और विलियम ग्रीन जूनियर जैसे वरिष्ठ अधिकारियों को भी हटाया जा चुका है। इन फैसलों पर प्रतिक्रिया देते हुए अमेरिकी सीनेटर जैक रीड ने चिंता जताई है और कहा है कि इससे रक्षा विभाग में अस्थिरता का संदेश जाता है।
यह सब ऐसे समय हो रहा है, जब अमेरिका को वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, खासकर चीन की तेजी से बढ़ती नौसैनिक ताकत के संदर्भ में। इसी को ध्यान में रखते हुए ट्रंप प्रशासन ने 2027 के लिए 1.5 ट्रिलियन डॉलर का रक्षा बजट प्रस्तावित किया है। इसमें 65 अरब डॉलर से अधिक की राशि नए युद्धपोतों और सपोर्ट जहाजों के निर्माण पर खर्च करने की योजना शामिल है।

Editorial Team
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