पढ़ें ब्लू जींस के ग्लोबल फैशन बनने की अनोखी कहानी (Picture Credit- AI Generated)
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। शायद ही कोई ऐसा हो, जो आज जींस पहने नजर नहीं आता। आज पूरी दुनिया में जो ब्लू जींस सबसे ज्यादा पहनी जाती है, उसे बनाने का श्रेय लिवाई स्ट्रॉस को जाता है, जो एक जर्मन मूल के अमेरिकी व्यापारी थे।
उन्होंने ही एक ऐसा कपड़ा तैयार किया जो न सिर्फ आरामदायक था, बल्कि बहुत सालों तक चलता था। इनका जन्म 26 फरवरी, 1829 को जर्मनी के बुटेनहाइम (बवेरिया) में हुआ था। आज उनके जन्मदिवस के मौके पर जानते हैं कैसे लिवाई स्ट्रॉस ने दुनिया को दिया आज के सबसे मशहूर जींस का ब्रांड-
कैसा था शुरुआती जीवन?
लिवाई ने अपनी शुरुआती पढ़ाई जर्मनी के बुटेनहाइम (बवेरिया) के ही एक स्कूल से पूरी की। साल 1847 में उनके पिता के निधन के बाद वे अपने परिवार के साथ अमेरिका (न्यूयॉर्क) आ गए। यहां उन्होंने अपने भाइयों के साथ रहकर व्यापार के गुर सीखे, जिसने भविष्य में उन्हें एक सफल बिजनेसमैन बनाया।
जींस बनाने का आइडिया कैसे आया?
अमेरिका में उस समय \“गोल्ड रश\“ का दौर था। उस समय हजारों लोग सोने की खदानों में काम करने सैन फ्रांसिस्को जा रहे थे। लिवाई भी वहीं पहुंच गए। उन्होंने देखा कि खदानों में काम करने वाले मजदूरों की पैंट बहुत जल्दी फट जाती थी। मजदूरों की इस परेशानी को देखकर लिवाई को एक ऐसे मजबूत कपड़े (डेनिम) की पैंट बनाने का विचार आया, जो खदान के कठिन हालातों में भी न फटे।
ऐसे बनी दुनिया की पहली जींस
साल 1871 में नेवादा के एक दर्जी, जैकब डेविस ने पैंट की जेबों को फटने से बचाने के लिए उन पर तांबे की छोटी कीलें (रिवेट्स) लगाने का एक शानदार तरीका खोजा। डेविस के पास इस आइडिया को अपने नाम पर रजिस्टर (पेटेंट) कराने के पैसे नहीं थे। इसलिए उन्होंने लिवाई स्ट्रॉस से हाथ मिलाया।
दोनों ने मिलकर 20 मई 1873 को इस डिजाइन का पेटेंट हासिल किया। इसी दिन को \“जींस\“ का आधिकारिक जन्मदिन माना जाता है। जल्द ही यह मजबूत पैंट किसानों, काउबॉय और मजदूरों की पहली पसंद बन गई।
दो घोड़ों वाला मशहूर लोगो
लिवाई अपनी जींस की मजबूती को लेकर इतने आश्वस्त थे कि उन्होंने इसे साबित करने के लिए एक नायाब तरीका निकाला। उन्होंने जींस के पीछे चमड़े का एक लेबल लगाया, जिसमें दो घोड़ों को एक जींस को विपरीत दिशाओं में खींचते हुए दिखाया गया था।
इसका सीधा-सा मतलब था कि यह जींस इतनी पक्की है कि घोड़े भी इसे फाड़ नहीं सकते। चूंकि उस दौर में कई मजदूर पढ़े-लिखे नहीं होते थे, इसलिए यह तस्वीर उनके लिए मजबूती और भरोसे का प्रतीक बन गई। आज भी यह \“टू हॉर्स\“ पैच लिवाइस ब्रांड की पहचान है।
महिलाओं के लिए भी बनाई जींस
अपनी जींस को लोगों के बीच लोकप्रिय होता देख कंपनी ने पहली बार 1934 में महिलाओं को ध्यान में रखते हुए जींस बनाई, जिसे \“लेडी लिवाइस\“ नाम दिया गया। वहीं, जब बाजार में उनकी जींस की नकल होने लगी, तो असली ब्रांड की पहचान के लिए उन्होंने 1936 से जींस की पिछली जेब पर एक छोटा-सा \“लाल टैब\“ लगाना शुरू कर दिया।
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