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उत्तराखंड कैबिनेट के बड़े फैसले, जनविश्वास एक्ट और यूसीसी संशोधन विधेयक सदन में होंगे पेश

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कैबिनेट ने दी कई अहम निर्णयों को स्वीकृति। प्रतीकात्मक



राज्य ब्यूरो, देहरादून। गैरसैंण में विधानसभा सत्र में कानूनी रूप देने के लिए उत्तराखंड जनविश्वास एक्ट और समान नागरिक संहिता संशोधन विधेयक पेश किए जाएंगे। इन विधेयकों को सदन में रखने के लिए कैबिनेट ने मंजूरी प्रदान कर दी है।

केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के क्रम में प्रदेश सरकार ने भी विभागों के अंतर्गत छोटे अपराध को अपराध की श्रेणी से बाहर करने के साथ ही जेल की सजा हटाने के लिए उत्तराखंड जन विश्वास (प्रविधानों में संशोधन) अध्यादेश बनाया है। इसमें प्रथम चरण में विभिन्न विभागों के सात कानूनों में ढील दी गई है। इनमें से कुछ में जेल की सजा को हटाया गया है तो कुछ में अवधि कम की गई है। यद्यपि, जुर्माने की राशि में भारी-भरकम बढ़ोतरी का प्रविधान किया गया है।

राज्य में अभी तक ऐसे 52 अधिनियम चिह्नित किए गए हैं, जिनमें इस तरह के कदम उठाए जाने हैं। इससे उद्यमियों को खासी राहत मिलेगी। इसी प्रकार समान नागरिक संहिता संशोधन अधिनियम में सरकार ने बिना पंजीकरण कराए लिव इन में रहने वालों के लिए सात साल की सजा का प्रविधान किया है तो बिना तलाक दिए दूसरी शादी करने वालों पर भी दंड की व्यवस्था की है। दोनों कानूनों में संशोधन को कैबिनेट मंजूरी प्रदान कर चुकी है। अब कैबिनेट ने इन्हें विधेयक के रूप में सदन में रखने को स्वीकृति दे दी है।
प्रदेश में रेप व पाक्सो की सुनवाई को खुलेंगे तीन नए फास्ट ट्रेक कोर्ट

प्रदेश में रेप और पाक्सो अधिनियम के तहत लंबित अपराधों के शीघ्र निपटारों की सुनवाई को देहरादून जिले के विकासनगर, ऊधमसिंह नगर जिले के काशीपुर और नैनीताल जिला मुख्यालय में फास्ट ट्रेक स्पेशल कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। केंद्र ने इसकी मंजूरी प्रदान कर दी है।

दरअसल, नियम यह है कि जिन जिलों में रेप व पाक्सो के 100 से अधिक मामले लंबित हैं वहां एक फास्ट ट्रेक स्पेशल कोर्ट और जिन जिलों में 300 से अधिक वाद लंबित हैं वहां एक जिले में दो कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। देहरादून और ऊधमसिंह नगर में इस तरह के अधिक मामले लंबित हैं। इस कारण इन दोनों जिलों में एक-एक फास्ट ट्रेक स्पेशल कोर्ट खोला गया है। प्रदेश में पहले से ही देहरादून, रुड़की, हरिद्वार व ऊधमसिंह नगर में फास्ट ट्रेक स्पेशल कोर्ट संचालित हो रहे हैं।
कोर्ट मैनेजर के 14 पदों को मिली स्वीकृति

कैबिनेट ने उच्च न्यायालय नैनीताल और जिला न्यायालयों के लिए 13 कोर्ट प्रबंधकों के पदों को स्वीकृति दी है। कोर्ट प्रबंधक का मुख्य कार्य न्यायालयों में प्रशासनिक कार्यों में सहायता करना, लंबित मामलों की निगरानी करना, और नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड के लिए फीडबैक प्रदान करना होता है।
सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली की मजबूती को पीएमयू का होगा गठन

प्रदेश में लोक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली और सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली की मजबूती को प्रोजेक्ट मैनेजमेंट यूनिट (पीएमयू) का गठन किया जाएगा। कैबिनेट ने पीएमयू के साथ ही स्टीयरिंग कमेटी के गठन को मंजूरी दी है। साथ ही पीएमयू के लिए 21 अस्थायी पद भी स्वीकृत किए हैं। दरअसल, विश्व बैंक के सहयोग से उत्तराखंड में सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली पंच वर्षीय परियोजना लागू होनी है।

850 करोड़ रुपये की इस परियोजनाओं के तहत 680 करोड़ रुपये विश्व बैंक से ऋण के माध्यम के रूप में मिलेंगे, तथा शेष राशि राज्य सरकार का अंशदान होगी। ऋण का भुगतान 90 प्रतिशत केंद्र सरकार एवं 10 प्रतिशत केंद्र सरकार द्वारा किया जाएगा। इस ऋण से राज्य में नवाचारी सुधारों को लागू करने के लिए न्यूनतम लागत पर धनराशि प्राप्त हो सकेगी।
कारागार के मिनिस्ट्रीयल संवर्ग में बढ़े पद

कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा विभाग के मिनिस्ट्रीयल संवर्ग के ढांचे में परिवर्तन हुआ है। कैबिनेट ने इस ढांचे में सात और पद बढ़ाने को स्वीकृति प्रदान की है। पहले इस संवर्ग में 34 पद थे। अब इनकी संख्या 41 हो जाएगी। नए पदों में प्रशासनिक अधिकारी का एक, प्रधान सहायक का एक, वरिष्ठ सहायक के दो व कनिष्ठ सहायक के तीन पद पद सृजित किए जाएंगे।
दूरी की मानकों को कैबिनेट ने नहीं दी स्वीकृति

कैबिनेट ने औद्योगिक विकास (खनन) विभाग के हाट मिक्स प्लांट की स्थापना दूरी के मानकों में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी नहीं दी है। दरअसल, खनन विभाग ने नदी तट से स्टोन क्रेशर लगाने की अनुमति 250 मीटर से घटाकर 50 मीटर कराने का अनुरोध किया था। इसके लिए पर्वतीय क्षेत्रों में हो रहे विकास कार्यों का हवाला दिया गया। यद्यपि, कैबिनेट ने इस पर सहमति नहीं जताई, साथ ही विभाग को इस संबंध में सुस्पष्ट प्रस्ताव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
हल्द्वानी में खुलेगी जीएसटी अपीलीय अधिकरण की अतिरिक्त पीठ

कैबिनेट ने राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों, यहां के बुनियादी ढांचे और कुमाऊं मंडल में पंजीकृत व्यापारियों की सुविधा के लिए जीएसटी अधिकारी की नैनीताल, हल्द्वानी में एक अतिरिक्त पीठ अथवा सर्किट बैंच खोलने को स्वीकृति दी। राज्य कर विभाग के इस प्रस्ताव को कैबिनेट ने स्वीकृति दी है। अभी अपीलीय अधिकरण की राज्य पीठ देहरादून में है।
इन्हें भी मिली स्वीकृति

  • उत्तराखंड लोक सेवा आयोग का चौबीसवां वार्षिक प्रतिवेदन सदन पटल में रखा जाएगा।
  • उत्तराखंड माल एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक को सदन में रखने को स्वीकृति
  • सार्वजनिक उद्यम ब्यूरो को औद्योगिक विकास विभाग से स्थानांतरित कर वित्त विभाग के अंतर्गत गठित करने का निर्णय। सिडकुल भी आएगा दायरे में।


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