जौनपुर: टीडी कॉलेज प्रोफेसर कुकर्म आरोप से बरी, जानें क्यों हुआ फैसला।
जागरण संवाददाता, जौनपुर। लाइन बाजार थाना क्षेत्र के निवासी 10 वर्षीय बच्चे से कुकर्म के आरोप में टीडी कालेज के विधि विभाग के प्रोफेसर संतोष सिंह, जो यूपी सिंह कालोनी के निवासी हैं, को अपर सत्र न्यायाधीश उमेश कुमार द्वितीय ने साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया। यह मामला तब सामने आया जब बच्चे की मां ने 31 मई 2023 को लाइन बाजार थाने में संतोष सिंह के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
आरोप के अनुसार, संतोष सिंह ने बच्चे से व्याकरण की किताब मांगी और उसे अपने साथ ले गए। बाद में आरोप लगाया गया कि किताब वापस लेने गए बच्चे के साथ कुकर्म किया गया। इसके साथ ही, संतोष सिंह ने बच्चे और उसकी मां को शिकायत न करने की धमकी दी और जान से मारने की चेतावनी दी।
इस मामले में बच्चे का मेडिकल परीक्षण किया गया और मजिस्ट्रेट के समक्ष उसका बयान भी दर्ज किया गया। पीड़ित बच्चे, डाक्टर और अन्य गवाहों के बयान भी लिए गए। हालांकि, इन बयानों में घटनास्थल के संबंध में कई विरोधाभास पाए गए। विशेष रूप से, पीड़ित बच्चा बार-बार अपने बयान बदलता रहा, जिससे मामले की गंभीरता पर सवाल उठने लगे।
मेडिकल परीक्षण करने वाले डाक्टर के बयान में भी विरोधाभास था, जो मामले की जटिलता को बढ़ाता है। इसके अलावा, डीएनए रिपोर्ट भी अदालत के समक्ष विश्वासनीय नहीं पाई गई। इन सभी कारणों से, कोर्ट ने संतोष सिंह को साक्ष्य के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
इस निर्णय ने न केवल आरोपित की स्थिति को स्पष्ट किया, बल्कि यह भी दर्शाया कि न्यायालय में साक्ष्य की गुणवत्ता और विश्वसनीयता कितनी महत्वपूर्ण होती है। इस मामले में, जहां एक ओर आरोप गंभीर थे, वहीं दूसरी ओर साक्ष्य की कमी ने न्यायालय को संतोष सिंह को दोषमुक्त करने के लिए मजबूर किया।
यह मामला समाज में बच्चों के प्रति सुरक्षा और न्याय की आवश्यकता को भी उजागर करता है। ऐसे मामलों में साक्ष्य का सही होना अत्यंत आवश्यक है, ताकि न्यायालय सही निर्णय ले सके। संतोष सिंह को अदालत ने साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया, जिससे यह स्पष्ट होता है कि न्यायालय में केवल आरोपों के आधार पर निर्णय नहीं लिया जा सकता।  |