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बिहार विधानसभा के ऐतिहासिक निर्णय: नगर निकाय, सिविल न्यायालय और नियुक्ति प्रक्रिया में बड़े बदलाव

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बिहार नगरपालिका (संशोधन) विधेयक 2026 के बारे में बताते मंत्री व‍िजय कुमार चौधरी। वीडियो ग्रैब  



राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार विधानसभा ने नगर निकायों की कार्य प्रणाली में बड़ा बदलाव करते हुए सशक्त स्थायी समिति के गठन की प्रक्रिया में संशोधन को मंजूरी दे दी है।

अब नगर निकायों गमों में सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों को महापौर या अध्यक्ष द्वारा नामित नहीं किया जाएगा, बल्कि उनका चयन वार्ड पार्षदों के गुप्त मतदान के जरिए होगा।  

इस संबंध में बिहार नगरपालिका (संशोधन) विधेयक 2026 को सदन ने पारित कर दिया। मंगलवार को संसदीय कार्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने विधेयक को सदन में पेश किया।
पक्षपात के लगते थे आरोप

उन्‍होंने कहा कि अब तक बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 (यथा संशोधित) के तहत सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों को महापौर या अध्यक्ष नामित करते थे।

इससे विरोधी गुट के वार्ड पार्षदों को समिति में स्थान नहीं मिल पाता था और पक्षपात के आरोप लगते थे। नए प्रविधान से अधिकारों के केंद्रीकरण पर रोक लगेगी और लोकतांत्रिक भागीदारी सुनिश्चित होगी।

विधेयक के उद्देश्यों में कहा गया है कि संशोधन का मकसद सशक्त स्थायी समिति के गठन की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, सहभागी और संतुलित बनाना है, ताकि विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों का समुचित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हो सके।

इसके माध्यम से स्थानीय निकायों में जवाबदेही बढ़ाने, निर्णय प्रक्रिया को लोकतांत्रिक बनाने और संविधान की मंशा के अनुरूप विकेंद्रीकरण को मजबूत करने का प्रयास किया गया है।
बोर्ड-निगमों में नियुक्ति का अधिकार आयोग को

विधानसभा ने बोर्ड-निगमों में नियुक्ति प्रक्रिया में भी बड़ा बदलाव किया है। अब तकनीकी पदों सहित वर्ग तीन और चार के पदों पर नियुक्ति का अधिकार संबंधित बोर्ड-निगमों के बजाय चयन आयोगों को सौंपा जाएगा।

इसके लिए सदन ने बिहार तकनीकी सेवा आयोग (संशोधन) विधेयक 2026 और बिहार कर्मचारी चयन आयोग (संशोधन) विधेयक 2026 को भी मंजूरी दी है।

हालांकि छंटनीग्रस्त कर्मियों और संविदा कर्मचारियों को इन संशोधनों से अलग रखा गया है। सरकार का तर्क है कि इससे नियुक्ति प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बनेगी तथा मनमानी की शिकायतों पर रोक लगेगी।
138 साल बाद बिहार का अपना सिविल न्यायालय अधिनियम

विधानसभा ने 138 वर्षों के बाद राज्य के लिए अलग सिविल न्यायालय कानून बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया। सदन ने बिहार सिविल न्यायालय विधेयक 2026 को पारित कर दिया।

अब तक राज्य में बंगाल, आगरा एवं असम सिविल न्यायालय अधिनियम, 1887 लागू था, जो उस समय के संयुक्त प्रांतों के लिए बनाया गया था।

सरकार का कहना है कि बिहार अब एक पूर्ण और पृथक राज्य है, इसलिए अपनी आवश्यकताओं के अनुरूप अलग सिविल न्यायालय अधिनियम आवश्यक था। नए कानून से न्यायिक व्यवस्था को आधुनिक और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।  
24 मिनट में चार विधेयक किए पास

मंगलवार को विधानसभा ने महज 24 मिनट में चार महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कर दिया। संसदीय कार्यमंत्री विजय कुमार चौधरी द्वारा पेश किए गए इन विधेयकों पर संक्षिप्त चर्चा हुई और उसके बाद सदन ने सहमति प्रदान कर दी।

विधानमंडल सत्र के दौरान नगर निकायों की सशक्त स्थायी समिति की बैठक नहीं होगी। इस मुद्दे को एआइएमआइएम विधायक अख्तरूल ईमान ने उठाया था।

श्रम संसाधन मंत्री संजय टाइगर ने कहा कि इस संबंध में आवश्यक प्रावधान किए जा रहे हैं और सरकार जल्द निर्देश जारी करेगी।   
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