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NRI के शोरूम पर कब्जा मामले में ठेकेदार को अंतरिम जमानत, यूटी प्रशासक के हस्तक्षेप के बाद हुई थी FIR

deltin33 1 hour(s) ago views 877
  

जिला अदालत में चल रही केस की सुनवाई। मंगलवार को आदेश जारी।



जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। सेक्टर-17 स्थित एक एनआरआई के शोरूम पर अवैध कब्जे के मामले में आरोपित ठेकेदार विक्रम सिंह को जिला अदालत से अंतरिम जमानत मिल गई है। अदालत ने आरोपित को पुलिस जांच में शामिल होने और सेक्टर-17 थाना पुलिस को 25 फरवरी को स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का भी आदेश दिया है।

यह मामला उस समय तूल पकड़ गया था जब पंजाब के राज्यपाल एवं यूटी प्रशासक के हस्तक्षेप के बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 13 फरवरी को सेक्टर-37 निवासी ठेकेदार विक्रम सिंह के खिलाफ केस दर्ज किया था। आरोपित पर आरोप है कि उसने ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले एनआरआई के सेक्टर-17 स्थित शोरूम पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया।

सूत्रों के अनुसार पीड़ित पक्ष ने अधिकारियों को मामले में निष्पक्ष जांच की मांग की थी। जिसे देखते हुए पुलिस विभाग ने जांच अधिकारी भी बदल दिया। अब इस केस की जांच सुदेश कुमार, सब-इंस्पेक्टर एवं पुलिस पोस्ट सेक्टर-22 के इंचार्ज को सौंपी गई है। शिकायतकर्ताओं ने पहले जांच को पक्षपातपूर्ण बताते हुए आपत्ति जताई थी।

दिवंगत मनमोहन कश्यप के कानूनी वारिस शिकायतकर्ताओं धर्मेंद्र कश्यप और शैलेंद्र कश्यप ने इस संबंध में चंडीगढ़ प्रशासक को विस्तृत शिकायत दी थी। शिकायत में सेक्टर-17बी स्थित एससीओ नंबर 103-104 की चौथी मंजिल पर आपराधिक अतिक्रमण, ताले तोड़ने, अवैध कब्जा, धमकी और अनधिकृत निर्माण के आरोप लगाए गए थे।

शिकायत के अनुसार मनमोहन कश्यप आस्ट्रेलिया में रहने वाले एनआरआई थे और उनके पास उक्त कमर्शियल प्राॅपर्टी में 7.5 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ-साथ चौथी मंजिल के आधे हिस्से का सह-स्वामित्व था, जिसका रिकार्ड एस्टेट ऑफिस में दर्ज है।

27 नवंबर 1976 को सह-मालिकों के बीच यूनाइटेड बिल्डर्स कंस्ट्रक्शन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से हुए समझौते में स्वामित्व का स्पष्ट बंटवारा किया गया था। इस संपत्ति को बाद में 7 अक्टूबर 2020 तक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को किराये पर दिया गया था।
एनआरआई वारिसों का आरोप

2006 में मनमोहन कश्यप और 2014 में उनकी माता कृष्णा गांदोत्रा के निधन के बाद, वैध वसीयतों के माध्यम से संपत्ति के अधिकार शिकायतकर्ताओं को मिले। ऑस्ट्रेलिया में रहने के कारण उन्होंने पहले केयरटेकर और बाद में स्पेशल पावर ऑफ अटार्नी धारक अमित गोयल को संपत्ति की देखरेख के लिए नियुक्त किया।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि एक पूर्व डीजीपी की पत्नी ने 22 नवंबर 2023 को अपनी 7.5 प्रतिशत हिस्सेदारी विक्रम सिंह को बेच दी। इसके बावजूद आरोपित ने पूरी चौथी मंजिल पर जबरन कब्जा कर लिया। आरोप है कि 5 मई 2024 को आरोपित अपने साथियों के साथ आया, ताले तोड़े, डुप्लीकेट चाबियां बनाईं और केयरटेकर की अनुपस्थिति में परिसर में घुस गया।
बार-बार शिकायत, नहीं हुई कार्रवाई

पीड़ित पक्ष का कहना है कि इस घटना के बाद पीसीआर बुलाई गई, सीसीटीवी फुटेज और गवाह उपलब्ध होने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई। केयरटेकर अमित गोयल ने पब्लिक विंडो पर आठ शिकायतें दीं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद एनआरआई के वारिसों ने प्रशासक से मुलाकात कर शिकायत सौंपी।

प्रशासक के निर्देश पर डीजीपी यूटी ने मामले की जांच के आदेश दिए, जिसके बाद 13 फरवरी को सेक्टर-17 थाना पुलिस ने आरोपी विक्रम सिंह के खिलाफ आइपीसी की धारा 448, 454, 427 और 34 के तहत केस दर्ज कर शोरूम को सील कर दिया।   
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