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प्रयागराज राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय की फाइल फोटो।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में बीसीए, एमए (होम साइंस) की पढ़ाई फिर से शुरू होगी। विश्वविद्यालय की ओर से इन पाठ्यक्रमों का संचालन जनवरी-2026 सत्र से होगा और इसी सत्र से विद्यार्थियों को फिर से इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश का अवसर मिलेगा।
इन पाठ्यक्रमों को स्थगित किया गया था
यह पाठ्यक्रम पूर्व में संचालित थे पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अनुपालन में पाठ्यक्रम संसोधन के लिए विश्वविद्यालय ने बीसीए और एमए गृह विज्ञान सहित कुछ पाठ्यक्रमों का संचालन स्थगित कर दिया गया था। हालांकि अब आवश्यक प्रक्रियाएं पूर्ण होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन पाठ्यक्रमों को दोबारा शुरू करने का निर्णय लिया है। जिन अध्ययन केंद्रों पर पूर्व में ये कोर्स संचालित थे, वहां प्रवेश की अनुमति प्रदान कर दी गई है। साथ ही नए अध्ययन केंद्रों के लिए भी आवेदन प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है।
इन शर्ताें को पूरा करना अनिवार्य
विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार बीसीए कार्यक्रम संचालित करने के लिए केंद्र का शासन अथवा एआइसीटीई से मान्यता प्राप्त होना अनिवार्य है। केंद्र के पास कंप्यूटर शिक्षा के क्षेत्र में न्यूनतम पांच वर्ष का अनुभव होना चाहिए तथा उसे उच्च स्तरीय पंजीकृत संस्था का दर्जा प्राप्त होना आवश्यक है। इसके अतिरिक्त केंद्र पर कम से कम 15 कंप्यूटरों से युक्त सुसज्जित प्रयोगशाला, 100 शीर्षकों की पुस्तकों वाला पुस्तकालय, ब्राडबैंड/इंटरनेट सुविधा और न्यूनतम तीन योग्य शिक्षक उपलब्ध होना अनिवार्य होगा। 10 प्लस-टू स्तर के डिप्लोमा या प्रमाणपत्र कार्यक्रम के संचालन का कम से कम दो वर्ष का अनुभव भी आवश्यक शर्तों में शामिल किया गया है।
बीएलआईएस के लिए पुस्तकालय संसाधन अनिवार्य
क्षेत्रीय सेवा प्रकोष्ठ प्रभारी प्रो. देवेश रंजन के अनुसार बीएलआइएस (पुस्तकालय एवं सूचना विज्ञान) कार्यक्रम के संचालन के लिए पुस्तकालय विज्ञान में स्नातक या स्नातकोत्तर स्तर की मान्यता प्राप्त योग्यता आवश्यक होगी। केंद्र पर न्यूनतम 200 पुस्तकों और 10 जर्नल्स से युक्त पुस्तकालय, ब्राडबैंड सुविधा तथा प्रायोगिक कार्यों के लिए डीडीसी (19वां संस्करण) और सीयर्स लिस्ट ऑफ सब्जेक्ट हेडिंग्स (6वां संशोधित संस्करण) जैसी मानक संदर्भ सामग्री उपलब्ध कराना अनिवार्य किया गया है। वहीं एमए गृह विज्ञान कार्यक्रम के लिए संबंधित विषय में शासन से स्नातकोत्तर स्तर की मान्यता तथा कम से कम तीन वर्ष तक स्नातक कार्यक्रम संचालित करने का अनुभव होना जरूरी है।
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