झारखंड का रांची विश्वविद्यालय। फाइल फोटो
जागरण संवाददाता, रांची। रांची विश्वविद्यालय की नींद अब खुली है। लंबे समय से मोरहाबादी के स्टाफ क्वार्टर में रह रहे लोगों का अब डिटेल मांगा है। दैनिक जागरण इस मामले को प्रमुखता से उठाता रहा है।
विवि ने क्वार्टर रहने वाले नियमित, अनुबंधित, वोकेशनल, सेवानिवृत्त कर्मियों से विवि प्रशासन ने विस्तृत जानकारी मांगी है। विवि प्रशासन ने कहा कि एक सप्ताह के अंदर जानकारी दें।
प्रपत्र के माध्यम से जानकारी नहीं देनेवाले कर्मियों का वेतन/मानदेय या पेंशन रोक दिया जाएगा। इसके अलावा विवि प्रशासन ने वैसे कर्मियों से भी आवेदन मांगे हैं, जो विवि क्वार्टर में रहना चाहते हैं। विवि प्रशासन समीक्षा के बाद ही क्वार्टर अलाट/ पुनः अलाट करने का निर्णय लिया है।
72 में से सिर्फ 20-25 कर्मचारी देते हैं किराया
बता दें कि रांची विश्वविद्यालय के इस स्टाफ क्वार्टर में कुल 72 स्थाई क्वार्टर है। इसमें से केवल 20 से 25 स्थाई कर्मचारी ही अपना नियमित किराया देते हैं।
लगभग 28 लोगों को रांची विश्वविद्यालय प्रशासन अवैध घोषित कर रखा है। तीन साल से विवि प्रशासन केवल कागजी कार्रवाई ही करता आ रहा है। भवन भी एकदम जर्जर हो चुका है।
2013 में कराया गया था निर्माण
इस आवासीय परिसर का निर्माण 2013 में किया गया था। यहां कर्मचारियों को घर आवंटन किया गया था, लेकिन कर्मचारी सेवानिवृत्त होते गए, पर कमरे को कमरे को वापस नहीं किया। अब भी उनका कब्जा बना हुआ है।
कुछ लोगों ने अपने ढंग से भवन में छेड़छाड़ भी कर दिया है। यहां कुछ लोग खटाल भी चलाने लगे थे, लेकिन दैनिक जागरण ने जब इसे उठाया तो खटाल बंद हो गया, लेकिन कब्जाधारी अब भी बने हुए हैं।
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