डॉक्टर विकास कुमार। फाइल फोटो
जागरण संवाददाता, चतरा। एयर एंबुलेंस हादसे ने एक ऐसी दर्दनाक कहानी छोड़ दी, जिसे सुनकर हर किसी की आंखें नम हो जा रही हैं। बिहार के औरंगाबाद जिले के मदनपुर थाना क्षेत्र के मैनका गांव निवासी बजरंगी प्रसाद के पुत्र डॉ. विकास कुमार को जैसे मौत खुद अपने साथ खींचकर ले गई।
दरअसल, एयर एंबुलेंस से मरीज संजय कुमार के साथ किसी दूसरे चिकित्सक को दिल्ली जाना था, लेकिन अचानक शाम करीब पांच बजे संबंधित डॉक्टर ने दिल्ली जाने से इनकार कर दिया। ऐसे में अंतिम समय पर रांची सदर अस्पताल में पदस्थापित डॉ. विकास कुमार को इस यात्रा के लिए तैयार किया गया।
तुरंत तैयार हो गए थे विकास
बताया जाता है कि ड्यूटी को प्राथमिकता देते हुए डॉ. विकास तुरंत तैयार हो गए और मरीज के साथ रवाना हो गए। उन्हें क्या पता था कि यह सफर उनकी जिंदगी का आखिरी सफर साबित होगा।
औरंगाबाद के विकास रांची सदर अस्पताल में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ के तौर पर कार्यरत थे। पत्नी एसबीआई की कचहरी शाखा में कार्यरत हैं। उनका एक 8 साल का बेटा है, जिसके सिर से पिता का साया उठ गया।
डॉ. गुप्ता मेडिकल इवैक्यूएशन मिशनों में सक्रिय भूमिका निभाते थे। उनकी असामयिक मौत से चिकित्सा जगत में गहरा शोक है। एयर एंबुलेंस क्रैश में उनकी मौत की खबर मिलते ही परिवार और गांव में मातम पसर गया।
डॉ. विकास के साथ काम कर चुके स्थानीय अपर समाहर्ता अरविंद कुमार ने बताया कि दिल्ली रवाना होने से पहले उनकी उनसे बातचीत हुई थी। उस दौरान डॉ. विकास ने खुद इस यात्रा की जानकारी दी थी।
इस दर्दनाक हादसे ने एक समर्पित चिकित्सक को हमेशा के लिए छीन लिया। कर्तव्य निभाने निकले डॉ. विकास की यह कहानी अब लोगों के दिलों में एक पीड़ा और सम्मान दोनों छोड़ गई है।
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