कैप्शन: देश में कफ सीरप के 58 सैंपल फेल (फाइल)
सुनील शर्मा, सोलन। देशभर में दवाओं की गुणवत्ता पर फिर प्रश्न खड़े हो गए हैं। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की ओर से जनवरी के लिए जारी ड्रग अलर्ट में 218 दवाओं, कफ सीरप व इंजेक्शन के सैंपल मानकों की कसौटी पर खरे नहीं उतरे। इनमें दिल, मिर्गी, ब्लड प्रेशर व शुगर जैसी गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं।
कुछ शैंपू, क्रीम, पाउडर, मेहंदी व आयरन की गोलियां भी गुणवत्ता में ठीक नहीं पाई गई हैं। मध्य प्रदेश में पिछले वर्ष जहरीली कफ सीरप पीने से कई जिलों में 20 से अधिक बच्चों की मौत के बाद दवाओं की निगरानी और सख्त कर दी है। देशभर में कफ सीरप के 58 सैंपल फेल हुए हैं। इनमें हिमाचल के 16 सैंपल शामिल हैं।
215 दवाओं के सैंपल फेल
रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में 215 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। इनमें हिमाचल प्रदेश की 71, उत्तराखंड की 28, गुजरात की 23, मध्य प्रदेश की 15, महाराष्ट्र की 13, तमिलनाडु की 11, राजस्थान की 10, हरियाणा की नौ, तेलंगाना की छह, पंजाब, उत्तर प्रदेश व पुडुचेरी की पांच-पांच, सिक्किम व बिहार की तीन-तीन, बंगाल, ओडिशा व कर्नाटक की दो-दो और केरल व दिल्ली की एक-एक दवा शामिल है। तीन दवाएं नकली पाई गई हैं।
जिन प्रमुख दवाओं के सैंपल मानकों पर खरे नहीं उतरे, उनमें अमृतसर के जैकसन उद्योग में मिर्गी के दौरे के दौरान इस्तेमाल होने वाली फैनिटाइन टेबलेट 100 एमजी (बैच टी-5616), उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित इस्टर्न हेल्थकेयर में डिप्रेशन, नसों का दर्द, माइग्रेन की रोकथाम व अनिद्रा के इलाज के लिए बनी दवा अमिट्रिप्टिलाइन (बैच डीआरटी 24032),
राजस्थान के अलवर स्थित इंडस फार्मा में कैंसर के उपचार में इस्तेमाल होने वाला बुप्रेर्नोफिन इंजेक्शन (बैच बीयूपी 325004), देहरादून के हिमालय मेडिटेक उद्योग में कोलेस्ट्रोल को कम करने के लिए उपयोग होने वाली अर्टोवस्टाटिन कैल्शियम टेबलेट (बैच एचटीएन 792 जी) व तेलंगाना के बैक्टोलैक फार्मूलेशन में हृदय में बनने वाले रक्त के थक्कों को कम करने में उपयोग होने वाली क्लोपिडोग्रेल दवा (बैच नंबर बीसीजीटी 25049) शामिल है।
हैवी मेटल और लेड की मात्रा
गुजरात के अहमदाबाद स्थित विनी कॉस्मेटिक्स में चेहरे को चमकदार बनाने के लिए उपयोग होने वाला व्हाइट टोन फेस पाउडर (बैच सीडब्ल्यू 3858) का सैंपल फेल हुआ है। टेस्ट रिपोर्ट में आया है कि इसमें हैवी मेटल व लेड की मात्रा है। इसका सैंपल जनवरी 2026 में ड्रग टेस्टिंग लैब बेंगलुरु ने लिया था।
प्रदेश में दवा उद्योगों की लगातार जांच जारी है। मानकों पर ठीक नहीं पाए जाने वाले उद्योगों को नोटिस जारी किए हैं। रिस्क बेस्ड इंस्पेक्शन की जा रही हैं और कई उद्योगों को उत्पादन बंद करने के निर्देश जारी किए हैं। दवा उत्पादन में कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ड्रग अलर्ट में जिन दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं उनके बैच को वापस मंगवाने की प्रक्रिया आरंभ कर दी है। -डॉ. मनीष कपूर, राज्य दवा नियंत्रक।
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