अंकुश लगाने के मुद्दे पर नागर विमानन मंत्रालय सक्रियता से विचार कर रहा है
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हवाई किरायों और संबद्ध शुल्कों में प्राइवेट एयरलाइंस द्वारा मनमाने ढंग से किए जाने वाले बदलावों पर अंकुश लगाने के मुद्दे पर नागर विमानन मंत्रालय सक्रियता से विचार कर रहा है। ये मुद्दे एक जनहित याचिका में उठाए गए हैं।
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की पीठ ने याचिका में उठाए गए मुद्दों को बहुत गंभीर बताया और केंद्र को इन पर विचार करके नतीजे पर पहुंचने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है। पीठ ने कहा, \“यह बहुत गंभीर चिंता का विषय है। अगर ऐसा नहीं होता तो हम 32 याचिकाएं स्वीकार नहीं करते।\“
23 मार्च को होगी अगली सुनवाई
केंद्र की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने कहा कि संबंधित मंत्रालय को जवाब दाखिल करने के लिए कम से कम तीन सप्ताह की जरूरत है, क्योंकि याचिका में उठाए गए मुद्दों पर वह सक्रिय रूप से विचार-विमर्श कर रहा है। मामले की अगली सुनवाई 23 मार्च को होगी।
इससे पहले 19 जनवरी को शीर्ष अदालत ने त्योहारों और आपात स्थितियों के दौरान हवाई किरायों में बेतहाशा बढ़ोतरी को शोषण करार देते हुए केंद्र और नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) से जवाब मांगा था।
सुप्रीम कोर्ट ने 17 नवंबर को इस मामले में केंद्र, डीजीसीए और भारतीय विमानपत्तन आर्थिक विनियामक प्राधिकरण को नोटिस जारी किए थे। सामाजिक कार्यकर्ता एस लक्ष्मीनारायण ने याचिका में विमानन क्षेत्र में पारदर्शिता और यात्री संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए एक स्वतंत्र एवं सशक्त नियामक बनाने की अपील की है।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)  |