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आम उत्पादक ध्‍यान दें : मंजर और फलों की सुरक्षा के लिए तीन चरणों में कर लें यह महत्‍वपूर्ण तीन काम

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आम में मंजर आ गया है।  



  
आम उत्पादक किसानों के लिए राहत, मंजर और फलों की सुरक्षा के लिए तीन चरणों में छिड़काव जरूरी

जागरण संवाददाता, भागलपुर। आम उत्पादक किसानों के लिए राहत भरी खबर है। कृषि विभाग ने आम के प्रमुख कीट और रोगों से बचाव को लेकर सामयिक सूचना जारी की है। विभाग ने स्पष्ट किया कि आम में अच्छी मंजर आने के बावजूद यदि समय पर सुरक्षा उपाय नहीं किए गए, तो फलन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में मंजरों की नियमित देखभाल और तीन चरणों में छिड़काव करना बेहद जरूरी है।

पौधा संरक्षण विभाग के सहायक निदेशक पवन कुमार पाल के अनुसार, आम के मंजरों पर मुख्य रूप से मधुआ कीट (मैंगो हापर), दहिया कीट (मीली बग), पाउडरी मिल्ड्यू और एन्थ्रेकनोज रोग का प्रकोप होता है। बीते कुछ वर्षों में रेड बैंडेड कैटरपिलर का हमला भी देखा गया है, जो मंजर और छोटे फलों को नष्ट कर देता है। इन सभी कीट और रोगों से बचाव के लिए सही समय पर तीन छिड़काव करने की अनुशंसा की गई है।
पहला छिड़काव : मंजर निकलने से पहले

पहला छिड़काव मंजर निकलने से पहले किया जाना चाहिए। इस चरण में अनुशंसित कीटनाशक का प्रयोग इस तरह करें कि दवा पेड़ की छाल की दरारों तक पहुंचे, जहां कीट छिपे रहते हैं। तापमान बढ़ने के साथ ये कीट तेजी से फैलते हैं, इसलिए शुरुआती नियंत्रण जरूरी है।
दूसरा छिड़काव : छोटे फल बनने पर

दूसरा छिड़काव तब करें जब मंजरों में सरसों के दाने के बराबर फल आ जाएं। इस चरण में कीटनाशक के साथ किसी एक फफूंदनाशी को मिलाना आवश्यक है, ताकि पाउडरी मिल्ड्यू और एन्थ्रेकनोज से सुरक्षा मिल सके। साथ ही, फलों को गिरने से बचाने के लिए अल्फा नेपथाईल एसीटिक एसिड (पीजीआर) मिलाने की सलाह दी गई है।
तीसरा छिड़काव: मटर या मार्बल साइज के फलों पर

तीसरा छिड़काव तब करना चाहिए जब आम के फल मटर या मार्बल साइज के हो जाएं। इस चरण में कीटनाशक के साथ पीजीआर और आवश्यकता अनुसार फफूंदनाशी का प्रयोग लाभकारी होता है। विभाग ने इमिडाक्लोप्रिड, डेल्टामेथ्रीन और थायोमेथाक्साम जैसे कीटनाशकों के साथ सल्फर, कापर ऑक्सीक्लोराइड, कार्बेन्डाजिम और हेक्साकोनाजोल जैसे फफूंदनाशकों की अनुशंसित मात्रा जारी की है।
फल मक्खी नियंत्रण और सावधानी
फलों में फल मक्खी नियंत्रण के लिए प्रति एकड़ पांच लाइफ टाइम ट्रैप लगाने की सलाह दी गई है। विभाग ने किसानों को चेतावनी दी है कि पीजीआर का प्रयोग निर्धारित मात्रा से अधिक न करें, अन्यथा फल गिरने की आशंका बढ़ जाती है। किसानों से अपील की गई है कि अधिक जानकारी या तकनीकी सहायता के लिए नजदीकी पौधा संरक्षण केंद्र, कृषि विज्ञान केंद्र या जिला कृषि कार्यालय से संपर्क करें। इस उपायों से आम के मंजर और छोटे फलों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी और फसल का उत्पादन बेहतर होगा। विभाग ने समय पर छिड़काव और नियमित देखभाल को फलन बढ़ाने की कुंजी बताया है।
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