ओटीटी प्लेटफार्म व गेमिंग में सब्सक्रिप्शन के नाम पर फ्रॉड हो रहा है। प्रतीकात्मक फोटो
चैतन्य ठाकुर, शिमला। सावधान रहें... फ्री ट्रायल आज, साइलेंट आटो-डेबिट कल। यह है नया ‘सब्सक्रिप्शन स्कैम’। डिजिटल सेवाओं के बढ़ते उपयोग के साथ प्रदेश में एक नया साइबर खतरा तेजी से उभर रहा है। साइबर ठग लोगों के बैंक खातों से चुपचाप पैसे काट रहे हैं।
विशेष रूप से शिमला, कुल्लू, सोलन और पर्यटन क्षेत्रों में आनलाइन एप, ओटीटी प्लेटफार्म, फिटनेस एप और गेमिंग सेवाओं के नाम पर फर्जी या भ्रामक फ्री ट्रायल आफर देकर लोगों को जाल में फंसाया जा रहा है। इस बात का रहस्योद्घाटन पुलिस ने साइबर थाने में आ रही शिकायतों के आधार पर किया है।
पहले फ्री ट्रायल का देते हैं लालच
साइबर सेल के अनुसार, शातिर पहले यूजर्स को फ्री ट्रायल का लालच देते हैं, जिसमें कार्ड डिटेल, यूपीआइ, आटो पे या नेट बैंकिंग की अनुमति ली जाती है। ट्रायल अवधि खत्म होते ही बिना स्पष्ट सूचना के आटो डेबिट शुरू हो जाता है। कई मामलों में यूजर्स को महीनों तक पता ही नहीं चलता कि उनके खाते से छोटी-छोटी रकम कट रही है, जो बाद में बड़ी आर्थिक हानि में बदल जाती है।
आटो रिनुअल की शर्तें न पढ़ने से हो रही ठगी
साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि ठग खासतौर पर ऐसे यूजर्स को निशाना बनाते हैं जो एप इंस्टाल करते समय \“Agree\“ पर क्लिक कर देते हैं और आटो रिनुअल की शर्तें पढ़ते ही नहीं हैं।
हिमाचल पुलिस का अलर्ट
प्रदेश पुलिस मुख्यालय ने इस ट्रेंड को गंभीर साइबर वित्तीय जोखिम बताते हुए अलर्ट जारी किया है। हिमाचल पुलिस प्रमुख डीजीपी अशोक तिवारी ने कहा कि साइबर अपराधी अब छोटे-छोटे आटो-डिडक्शन माडल का इस्तेमाल कर रहे हैं, जिससे पीड़ित को तुरंत संदेह नहीं होता। प्रदेश के नागरिकों को किसी भी फ्री ट्रायल, एप सब्सक्रिप्शन या आटो पे अनुमति देने से पहले पूरी शर्तें पढ़नी चाहिए। अगर किसी खाते से बिना जानकारी के राशि कट रही है तो तुरंत बैंक और साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करें।
कई शिकायतें मिली
पुलिस ने यह भी चेतावनी दी है कि फर्जी वेबसाइट्स और नकली एप्स गूगल सर्च और इंटरनेट मीडिया विज्ञापनों के माध्यम से भी ठगी की जा रही है। शिमला साइबर थाना को हाल के महीनों में कई ऐसी शिकायतें मिली हैं, जिनमें यूजर्स ने ओटीटी, एडिटिंग एप, क्लाउड स्टोरेज और गेमिंग प्लेटफार्म के नाम पर आटो-डिडक्शन की शिकायत की है। कई मामलों में विदेशी पेमेंट गेटवे के माध्यम से राशि काटी गई, जिससे रिफंड प्रक्रिया भी जटिल हो गई।
लो-विजिबिलिटी फ्राड माडल
विशेषज्ञों का कहना है कि 10 से 99 रुपये जैसी छोटी राशि के आटो-डिडक्शन से शुरुआत होती है, ताकि यूजर को तुरंत संदेह न हो। बाद में यही रकम हर महीने कटती रहती है। यह साइबर ठगी का \“लो-विजिबिलिटी फ्राड माडल\“ माना जा रहा है, जो तेजी से फैल रहा है।
ऐसे पहचानें सब्सक्रिप्शन स्कैम
- फ्री ट्रायल के नाम पर कार्ड/यूपीआइ आटो-पे मांगना
- छोटी राशि का बार-बार आटो-डिडक्शन
- कैंसल आप्शन छुपा हुआ या जटिल प्रक्रिया
- अनजान एप या वेबसाइट से सब्सक्रिप्शन मैसेज
- विदेशी पेमेंट गेटवे से कटौती
खुद को ऐसे रखें सुरक्षित
- किसी भी फ्री ट्रायल से पहले आटो-रिन्यूअल सेटिंग जांचें
- बैंक एसएमएस और स्टेटमेंट नियमित चेक करें
- अनजान एप को पेमेंट अनुमति न दें
- सब्सक्रिप्शन तुरंत मैनेज/कैंसल करें
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