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तीन लाख रुपये के फर्जी चलान में भागलपुर के कार्यपालक अभियंता दोषी, पेंशन में 5% कटौती

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प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर।  



जागरण संवाददाता, भागलपुर। भागलपुर में एनएच विभाग के कार्यपालक अभियंता रहे नागेंद्र भगत ने फर्जी चालान के आधार पर एक महिला ठेकेदार को तीन लाख रुपये का भुगतान कर दिया था। मामले की जांच में आरोप सही पाए जाने पर पथ निर्माण विभाग के अपर सचिव ने उनके विरुद्ध कार्रवाई करते हुए पेंशन राशि में दो वर्षों तक पांच प्रतिशत कटौती का आदेश जारी किया है।

यह मामला वर्ष 2016-17 के एकरारनामा के तहत कराए गए कार्य से जुड़ा है। आरोप है कि बिटुमेन और इमल्शन के चालानों का सत्यापन किए बिना ही मापी पुस्तिका में फर्जी चालानों के आधार पर भुगतान किया गया। पहले आरोप पत्र गठित किया गया और 30 दिसंबर 2020 से विभागीय कार्यवाही शुरू की गई।
कार्यपालक अभियंता पर अतिरिक्त आरोप

कार्यपालक अभियंता पर यह भी आरोप था कि उन्होंने प्रमंडल में कार्यरत सहायक (एसडीइओ) अभियंता और कनिष्ठ अभियंता (जेई) के कार्यक्षेत्र का अनुचित एवं अनाधिकृत रूप से बार-बार बंटवारा किया।स्थानांतरण से पूर्व सहायक अभियंता एवं पत्राचार लिपिक के विरुद्ध कार्रवाई की अनुशंसा भी की गई। अधीक्षण अभियंता (एसई) द्वारा प्रमंडलीय कार्यालय के निरीक्षण के दौरान कई त्रुटियां पाई गई। इसके आधार पर 24 मार्च 2021 को तीन आरोप गठित कर उन्हें पूर्व से संचालित विभागीय कार्यवाही में शामिल किया गया। कार्यपालक अभियंता ने स्पष्टीकरण दिया, लेकिन उसे असंतोषजनक मानते हुए दंडात्मक कार्रवाई की गई।
फर्जी चालान और अलकतरा आपूर्ति

एनएच-80 के किमी 136 से 158 तक आकस्मिक मरम्मत कार्य कराया गया था। इस कार्य से संबंधित 78 लाख 5 हजार 154 रुपये की राशि मापी पुस्तिका में अंकित की गई, जिसमें से समेकित रूप से तीन लाख रुपये का भुगतान किया गया। महिला ठेकेदार द्वारा बिटुमेन और इमल्शन के 20 चालान सत्यापन के लिए आईओसीएल को भेजे गए। 27 मार्च 2018 को प्राप्त रिपोर्ट में 20 में से 19 चालान अवैध पाए गए। इसके बावजूद 25 सितंबर 2019 को आपूर्ति आदेश के विरुद्ध वास्तविक उठाव की सूचना के लिए आईओसीएल को पत्र लिखा गया। सत्यापन नहीं कराया गया।
निजी स्वार्थ में अभियंताओं को हटाने का आरोप

बाइपास निर्माण परियोजना में पदस्थ सहायक अभियंता अजय कुमार पांडेय और जेई अविनाश कुमार शर्मा द्वारा कार्य सही ढंग से कराया जा रहा था। आरोप है कि कार्यपालक अभियंता ने निजी स्वार्थवश दूसरे सहायक अभियंता और कनिष्ठ अभियंता से विपत्र तैयार कराकर ठेकेदार को भुगतान करा दिया। इसके कारण उचित कर्मचारियों को परियोजना से हटा दिया गया।
स्थानांतरण से पहले अनुशंसा निराधार

कार्यपालक अभियंता ने तबादले से तीन दिन पूर्व सहायक अभियंता अजय कुमार पांडेय और राजवंश सिंह के विरुद्ध कार्रवाई की अनुशंसा अधीक्षण अभियंता को भेजी। जांच में आरोप निराधार पाए गए और अजय कुमार पांडेय को दोषमुक्त कर दिया गया। मुख्यालय ने इसे गलत मानसिकता का परिचायक बताया।
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