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बिहार में दाखिल-खारिज नियमों की अनदेखी, दूसरे की सुनवाई पूरी हुई नहीं; तीसरा आवेदन हो गया मंजूर

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दाखिल-खारिज नियमों की अनदेखी। (AI Generated Image)



अरविंद कुमार सिंह, जमुई। नियमावली को ताक पर रखकर दाखिल खारिज किए जाने का सदर अंचल से एक दिलचस्प मामला सामने आया है।

यहां दाखिल खारिज का रिजेक्ट आवेदन तीसरी बार दाखिल हुआ और स्वीकृत भी हो गया। यह सब क्यों और कैसे हुआ, यह तो संबंधित अधिकारी ही बेहतर बता सकते हैं।

फिलहाल मामले को गंभीर बताते हुए अपर समाहर्ता ने जांचोपरांत दोषी के विरुद्ध विधि सम्मत कार्रवाई किए जाने की बात कही है। नियमावली के मुताबिक अंचल से एक बार दाखिल खारिज का आवेदन रिजेक्ट हो जाने के बाद दूसरी बार वहां सुनवाई नहीं हो सकती है। इसके लिए फिर आवेदक को डीसीएलआर के कोर्ट में आवेदन करना होता है।

यहां डीएसएलआर के फैसले के मुताबिक आगे की कार्यवाही सुनिश्चित होती है। लेकिन जमुई अंचल अंतर्गत सतगामा मुहल्ले की सावित्री देवी का पहली बार आवेदन खारिज होने के दूसरी बार अंचल में ही आवेदन करती है।

लेकिन, इसका निष्पादन होने से पहले ही तीसरी बार आवेदन दाखिल हो जाता है। यहां अंचल अधिकारी से लेकर संबंधित कर्मचारियों की कृपा बरसती है और दूसरा आवेदन खारिज होने से पहले तीसरा आवेदन स्वीकृत हो जाता है।
यह है मामला

शहर के सतगामा मोहल्ला में रंजीत यादव की पत्नी सावित्री देवी के नाम 30 अगस्त 2023 को 7.25 डिसमिल जमीन का निबंधन हुआ था।

दो अलग-अलग खेसरा की यमुना प्रसाद सोनार से क्रय की गई उक्त जमीन की दाखिल खारिज का आवेदन पांच जनवरी 2024 को डाला गया। 11 माह की लंबी सुनवाई के पश्चात 25 नवंबर 2024 को अंचल अधिकारी ललिता कुमारी ने आवेदन अस्वीकृत कर दिया।

एक बार पुनः सात महीने बाद उक्त जमीन की ही दाखिल खारिज का आवेदन 15 जून 2025 को ऑनलाइन किया जाता है। सुनवाई के पश्चात नौ दिसंबर 2025 को अंचल अधिकारी ललिता कुमारी द्वारा राजस्व कर्मचारी एवं प्रभारी अंचल निरीक्षक के जांच प्रतिवेदन के आधार पर वाद संख्या 4284/23-24 में अस्वीकृत किए जाने को आधार बनाकर अस्वीकृत किया गया।

कायदे से यही होना भी चाहिए था। इस बीच अस्वीकृत होने से पहले ही एक बार फिर से सावित्री देवी ने 30 सितंबर 2025 को दाखिल खारिज के लिए आनलाइन आवेदन किया।

इस बार इनका काम इतना फास्ट चला कि मत पूछिए! आवेदन दाखिले की तारीख 30 सितंबर को ही पहली सुनवाई और कर्मचारी को आवेदन अग्रसारित हो जाता है।

उक्त तिथि को ही कर्मचारी रिपोर्ट भी आ जाता है। यह अलग बात है कि इस बार कर्मचारी रिपोर्ट बदला हुआ होता है। विक्रेता जमाबंदी रैयत का स्वयं एवं पोता है। भूमि रैयती खाते की है। जमीन पर खरीदार का शांतिपूर्ण दखल कब्जा है।

अतः आपत्ति नहीं हो तो दाखिल खारिज की स्वीकृति दी जा सकती है की रिपोर्ट के साथ 30 सितंबर को ही राजस्व अधिकारी को अग्रसारित कर दिया जाता है। राजस्व अधिकारी भी काफी फास्ट निकलते हैं और 30 सितंबर को ही अंचल अधिकारी को आवेदन अग्रसारित कर देते हैं।

साथ में आम और खास सूचना भी निर्गत करने का काम पूरा कर लिया जाता है। अब आम और खास सूचना के लिए निर्धारित अवधी को ध्यान में रखते हुए 15 कार्य दिवस पूर्ण होने से पहले ही 17 अक्टूबर को अंचल अधिकारी ललिता कुमारी द्वारा ही दाखिल खारिज की स्वीकृति प्रदान कर दी जाती है। यह सब क्यों और कैसे हुआ, यह अलग जांच का विषय है
स्वीकृति देने और लंबित रखने का बना इतिहास

दाखिल खारिज का पहला आवेदन करीब 11 महीने तथा दूसरा आवेदन सात महीने तक लंबित रहा। तीसरी बार किया गया आवेदन मात्र 17 दिनों में निष्पादित हुआ। इस बीच गांधी जयंती रविवार नवरात्र और दशहरा की छुट्टी उक्त दिवस में ही शामिल है।

यह भी पढ़ें- बिहार में सरकारी भूमि के दाखिल खारिज व जमाबंदी के 10 हजार से अधिक मामले लंबित


एक बार आवेदन रिजेक्ट होने के बाद अंचल में ही दूसरी बार दाखिल खारिज वाद दायर नहीं हो सकता है। अगर दायर हो भी गया तो उसे स्वीकृत करना गंभीर अपराध है।
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रविकांत सिन्हा, अपर समाहर्ता, जमुई।
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