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चांद सिकुड़ रहा है..... नासा के लिए विनाशकारी हो सकती हैं चंद्रमा पर मिली एक हजार से ज्यादा नई दरारें

LHC0088 1 hour(s) ago views 438
  

नासा के लिए विनाशकारी हो सकती हैं चंद्रमा पर मिली एक हजार से ज्यादा नई दरारें (फोटो- एक्स)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अगर आपको रात में चांद छोटा दिखाई देने लगा है तो आप गलत नहीं हैं। एक नए अध्ययन ने पुष्टि की है कि चांद सिकुड़ रहा है। नेशनल एयर एंड स्पेस म्यूजियम्स सेंटर फॉर अर्थ एंड प्लेनेटरी के विज्ञानियों ने चंद्रमा की सतह पर 1,000 से अधिक अज्ञात दरारें खोजी हैं। इससे पता चलता है कि चंद्रमा सिकुड़ रहा है और अपना आकार बदल रहा है।

अंतरिक्ष यात्रियों को खतरा
चिंताजनक बात यह है कि इन निष्कर्षों से संकेत मिलता है कि भविष्य में चंद्रमा की सतह पर अन्वेषण करने या रहने वाले अंतरिक्ष यात्रियों को विनाशकारी भूकंपों का खतरा हो सकता है। अध्ययन के प्रमुख लेखक कोल निपावर ने कहा कि दरारों की खोज से चंद्रमा की भूवैज्ञानिक विशेषताओं को समझने में मदद तो मिलती है, लेकिन यह उन अंतरिक्ष एजेंसियों के लिए विनाशकारी साबित हो सकती हैं जिनके प्रोब चंद्रमा पर हैं।

साथ ही उन एजेंसियों के लिए भी जो वहां मानव भेजने की योजना बना रही हैं। विशेष रूप से, इसमें नासा शामिल है, जो आर्टेमिस मिशन के तहत 2028 तक अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा पर भेजने की योजना बना रहा है।

इसलिए सिकुड़ रहा है चंद्रमा
चंद्रमा का निर्माण लगभग 4.5 अरब वर्ष पहले हुआ था और एक समय यह पिघला हुआ था। अरबों वर्षों में, यह धीरे-धीरे ठंडा होता गया। पृथ्वी के विपरीत, जो सक्रिय टेक्टोनिक्स प्लेट और ज्वालामुखी गतिविधि के माध्यम से आंतरिक ऊष्मा उत्सर्जित करती है, चंद्रमा का आंतरिक भाग काफी हद तक ठोस हो गया है, जिससे एक कटोर बाहरी परत बनी हुई है।

जब यह आंतरिक भाग और ठंडा होता है, तो चंद्रमा थोड़ा सिकुड़ता है। यह कुछ हद तक उस प्रक्रिया के समान है जैसे पका हुआ अंगूर सूखकर किशमिश बनने पर सिकुड़ जाता है। क्योंकि इसका आंतरिक भाग ठंडा हो रहा है और सतह संकुचित हो रही है इसके कारण चंद्रमा पर खास तरह की भू-आकृतियां बनी हैं, जिन्हें लोबेट स्कार्म्स कहा जाता है।

ये संरचनाएं तब बनती हैं जब चंद्रमा की पपड़ी संकुचित होती है और परिणामस्वरूप उत्पन्न बल पदार्थ को ऊपर की ओर धकेलते हुए पपड़ी के ऊपर एक दरार का निर्माण करते हैं।
लूनर मारिया में दिखीं 1,114 दरारें

  

नए अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने चंद्रमा की सतह पर स्थित विशाल, गहरे मैदानों, जिन्हें लूनर मारिया कहा जाता है, में अजीब दरारें देखीं। उन्होंने इन दरारों को स्माल मारे रिज (एसएमआर) नाम दिया है। कोल निपावर ने कहा कि अपोलो युग से ही हमें चंद्र उच्चभूमि में लोबेट स्कार्ब्स की व्यापकता के बारे में जानकारी थी, लेकिन यह पहली बार है जब विज्ञानियों ने लूनर मारिया में इसी तरह की विशेषताओं को देखा है।

नए अध्ययन में टीम ने 1,114 एसएमआर की खोज की, जिससे चंद्रमा पर पाए गए कुल एसएमआर की संख्या 2,634 हो गई है। औसतन, एसएमआर लगभग 12.4 करोड़ वर्ष पुराने हैं, जबकि लोबेट स्कार्प लगभग 10.5 करोड़ वर्ष पुराने हैं।

क्रेडिट- जागरण रिसर्च
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