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जाली मैट्रिक प्रमाण-पत्र कांड: पूर्व अंचलाधिकारी प्रिंस राज बर्खास्त, विजय कुमार सिन्हा का सख्त संदेश

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उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा



राज्य ब्यूरो, पटना। जाली शैक्षणिक प्रमाण-पत्र के आधार पर सरकारी सेवा पाने के मामले में सुपौल सदर के पूर्व अंचलाधिकारी प्रिंस राज को राज्य सरकार ने बर्खास्त कर दिया है। मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने उनकी सेवा समाप्ति का आदेश जारी किया।उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि सरकार फर्जीवाड़े पर शून्य सहनशीलता की नीति अपनाए हुए है।उन्होंने स्पष्ट किया कि नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं होगा। जो भी व्यक्ति धोखाधड़ी कर सेवा में आया है, उसके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार ने इसे प्रशासनिक शुचिता बनाए रखने की दिशा में आवश्यक कदम बताया है।
दो नाम और दो जन्मतिथि से परीक्षा देने का खुलासा

विभागीय अभिलेखों के अनुसार प्रिंस राज ने वर्ष 2006 की माध्यमिक परीक्षा का प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया था। उन्होंने यह परीक्षा एसटीएसवाई हाई स्कूल, मनमोहन (मधुबनी) से उत्तीर्ण बताई थी।

जांच में सामने आया कि वर्ष 2004 में उन्होंने धर्मेंद्र कुमार नाम से मैट्रिक परीक्षा पास की थी। दो अलग-अलग नाम और जन्मतिथि से परीक्षा देने का मामला विशेष निगरानी जांच में उजागर हुआ।

विशेष निगरानी इकाई द्वारा दर्ज कांड संख्या 04/2025 में यह तथ्य प्रमाणित हुआ। आरोप है कि 2006 के प्रमाण-पत्र का उपयोग आयु और शैक्षणिक योग्यता सिद्ध करने में किया गया।
बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने 2006 का प्रमाण-पत्र किया रद्द

निर्णायक मोड़ तब आया जब बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने 1 अगस्त 2025 को 2006 का अंकपत्र और प्रमाण-पत्र रद्द कर दिया। समिति ने जांच में प्रमाण-पत्र को जाली और कूटरचित पाया।


इसके बाद विभाग ने बिहार लोक सेवा आयोग से मंतव्य मांगा। आयोग ने निर्धारित प्रक्रिया पूरी कर चयनमुक्त करने के लिए विभाग को स्वतंत्र बताया।

नियुक्ति अधिसूचना में स्पष्ट प्रावधान था कि गलत प्रमाण-पत्र मिलने पर सेवा समाप्त की जा सकती है। इसी आधार पर विभाग ने सेवा समाप्ति का निर्णय लिया।
60-62वीं संयुक्त परीक्षा से हुआ था चयन

प्रिंस राज का चयन बीपीएससी की 60-62वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा के माध्यम से हुआ था। वर्ष 2019 में नियुक्ति के बाद उन्होंने प्रशिक्षण प्राप्त किया।

उनकी पहली पदस्थापना राजस्व अधिकारी के रूप में चनपटिया (पश्चिम चंपारण) में हुई थी। बाद में विभिन्न पदों पर उनका स्थानांतरण हुआ।
वर्ष 2023 में उनकी सेवा संपुष्ट भी कर दी गई थी। हालांकि शैक्षणिक प्रमाण-पत्र रद्द होने के बाद उनकी नियुक्ति की वैधता समाप्त हो गई।
मंत्रिपरिषद की मंजूरी के बाद तत्काल प्रभाव से बर्खास्तगी

शुक्रवार को मंत्रिपरिषद से अनुमोदन मिलने के बाद सेवा समाप्ति का आदेश जारी हुआ। सरकार ने उन्हें तत्काल प्रभाव से पद से बर्खास्त कर दिया।
मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने कहा कि यह कदम जनता के विश्वास को मजबूत करेगा।

उन्होंने दोहराया कि फर्जी प्रमाण-पत्र पर नौकरी पाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। राज्य सरकार ने साफ संकेत दिया है कि प्रशासन में ईमानदारी सर्वोपरि है। इस कार्रवाई को पारदर्शी शासन व्यवस्था की दिशा में सख्त संदेश माना जा रहा है।

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