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जम्मू-कश्मीर में 2019 के बाद शिक्षकों की सीधी भर्ती नहीं, 594 लेक्चरर पद एसएसबी को भेजे

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स्कूल शिक्षा विभाग का विधानसभा में जवाब, रिक्त पदों की स्थिति स्पष्ट।



सुरेंद्र सिंह, जम्मू। जम्मू-कश्मीर में वर्ष 2019 के बाद से शिक्षकों की सीधी भर्ती नहीं की गई है। यह जानकारी स्कूल शिक्षा विभाग ने विधानसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में दी। प्रश्न में वर्ष 2014 के बाद भर्ती पर कथित रोक, रिक्त पदों की वर्तमान स्थिति तथा स्कूलों के अपग्रेड से जुड़े मुद्दों पर सरकार से स्पष्टीकरण मांगा गया था।

सरकार ने अपने उत्तर में बताया कि जनरल लाइन, विज्ञान, गणित और उर्दू विषयों में शिक्षकों की अंतिम भर्ती वर्ष 2019 में सेवा चयन बोर्ड (एसएसबी) के माध्यम से पूरी की गई थी। इसके बाद प्रत्यक्ष भर्ती कोटे के अंतर्गत कोई नई नियुक्ति नहीं हुई है। विभाग ने स्पष्ट किया कि जिन पदों पर पहले आरईटी के रूप में कार्यरत शिक्षकों को शिक्षक ग्रेड-तीन के रूप में नामित किया गया, उन पदों को प्रत्यक्ष भर्ती कोटे से समायोजित कर घटा दिया गया।

जम्मू संभाग में शिक्षकों के रिक्त पदों को लेकर सरकार ने कहा कि वर्तमान में यहां कोई पद रिक्त नहीं है। पदोन्नति कोटे के अंतर्गत रिक्तियों को विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) के माध्यम से भरा जा रहा है।स्कूलों के अपग्रेड के संबंध में विभाग ने बताया कि प्राथमिक से माध्यमिक अथवा उच्च माध्यमिक स्तर तक बड़े पैमाने पर अपग्रेड का फिलहाल कोई तात्कालिक प्रस्ताव नहीं है।
वित्त विभाग की स्वीकृति अनिवार्य

पिछले वर्षों में अनेक स्कूलों को अपग्रेउ किया जा चुका है और अब प्राथमिकता बुनियादी ढांचे को मजबूत करने तथा स्टाफ की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर है। विभाग ने कहा कि अपग्रेड प्रक्रिया में भवन निर्माण, अतिरिक्त कक्षाओं, प्रयोगशालाओं और नए पदों के सृजन जैसी वित्तीय आवश्यकताएं शामिल होती हैं, जिनके लिए वित्त विभाग की स्वीकृति अनिवार्य है।

वहीं राजौरी जिले के संदर्भ में सरकार ने बताया कि 27 विषयों में लेक्चररों के 594 पद एसएसबी के माध्यम से भरे जाएंगे, जबकि पदोन्नति कोटे से भी भर्ती प्रक्रिया जारी है। शैक्षणिक गुणवत्ता सुधारने के लिए विभाग ने ऑनलाइन शिक्षण, क्लस्टर रिसोर्स सेंटर की सक्रिय भागीदारी, विषय-विशेष शिक्षकों की तैनाती, आवश्यकता आधारित पदस्थापन तथा नियमित आनलाइन व आफलाइन निरीक्षण जैसी पहल शुरू की हैं।

सरकार का दावा है कि इन कदमों से शैक्षणिक परिणामों में सुधार और स्कूलों में शत-प्रतिशत स्टाफ उपलब्धता सुनिश्चित करने का लक्ष्य हासिल किया जाएगा।
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