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दुष्कर्म के आरोप में रिटायर्ड नेवी अफसर को जमानत, कोर्ट ने गिरफ्तारी के आधार पर उठाए सवाल

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तीस हजारी कोर्ट ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार रिटायर्ड नेवी अफसर को जमानत दे दी। फाइल फोटो



जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। तीस हजारी एडिशनल सेशंस जज की कोर्ट ने शादी का झांसा देकर रेप के आरोप में गिरफ्तार एक रिटायर्ड नेवी ऑफिसर को रेगुलर बेल दे दी। कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी के समय आरोपी को जो ग्राउंड्स ऑफ अरेस्ट दिए गए थे, वे सुप्रीम कोर्ट के तय स्टैंडर्ड्स पर खरे नहीं उतरे।

एडिशनल सेशंस जज वीरेंद्र कुमार खरता ने आरोपी को 25,000 रुपये के पर्सनल बॉन्ड और इतनी ही रकम के दो श्योरिटी पर बेल दी। आरोपी पर इंडियन पीनल कोड (IPC) के सेक्शन 376 के तहत एक ही महिला से बार-बार रेप करने का आरोप है।
कोर्ट ने देखा कि इन्वेस्टिगेशन ऑफिसर द्वारा आरोपी को दिए गए डॉक्यूमेंट का टाइटल “ग्राउंड्स ऑफ अरेस्ट“ था, लेकिन उसमें सिर्फ गिरफ्तारी के आम कारण बताए गए थे, जबकि कानून के मुताबिक आरोपी को गिरफ्तारी के लिए अलग-अलग और खास ग्राउंड्स बताने होते हैं।

कोर्ट ने कहा कि गिरफ्तारी के ग्राउंड्स और गिरफ्तारी की वजह में काफी अंतर है, और इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस का पालन नहीं किया गया। प्रॉसिक्यूशन के अनुसार, आरोपी और शिकायत करने वाली महिला लगभग 10 साल से रिलेशनशिप में थे, और आरोपी ने शादी का वादा करके शिकायत करने वाली महिला के साथ कई बार फिजिकल रिलेशन बनाए।

प्रॉसिक्यूशन ने आरोपी की शादी से पहले महिला द्वारा किए गए WhatsApp चैट और ऑनलाइन मनी ट्रांसफर के स्क्रीनशॉट भी पेश किए। पीड़िता ने कोर्ट में बेल एप्लीकेशन का विरोध किया, यह आरोप लगाते हुए कि आरोपी ने अपनी शादी छिपाकर उसकी ज़िंदगी बर्बाद कर दी।

हालांकि, कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में दोनों के बीच रिलेशनशिप और फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन का पता चलता है, लेकिन यह साफ नहीं है कि फिजिकल रिलेशन सिर्फ शादी के बहाने बनाया गया था या नहीं।

यह भी पढ़ें: सुप्रीम कोर्ट मेट्रो स्टेशन के हिंदी नाम पर DMRC की आपत्ति, दिल्ली हाई कोर्ट ने मांगा हलफनामा
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