राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र परिसर में आयोजित प्रमंडल स्तरीय बागवानी महोत्सव। जागरण
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर । रंग-बिरंगे फूलों की खुशबू, चमकदार फलों की कतार और अनोखी आकार-प्रकार की सब्जियों ने प्रमंडल स्तरीय बागवानी महोत्सव को आकर्षण का केंद्र बना दिया। कहीं विशाल कद्दू लोगों को चौंका रहा था तो कहीं दुर्लभ किस्म की सब्जियां उत्सुकता जगा रही थीं।
किसानों और उद्यान प्रेमियों के इस संगम में आधुनिक तकनीक, नवाचार और पारंपरिक खेती का सुंदर मेल देखने को मिला। महोत्सव ने खेती की बदलती तस्वीर पेश की, इसमें यह दिखा कि मेहनत और प्रयोग से खेतों में किस तरह रंगों और खुशहाली की बहार लाई जा सकती है।
फल-सब्जी से लेकर फूलों की प्रदर्शनी
राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र परिसर में आयोजित प्रमंडल स्तरीय बागवानी महोत्सव का समापन किसानों के सम्मान के साथ हुआ। महोत्सव में फल, सब्जी और फूलों की आकर्षक प्रदर्शनी लगाई गई। कुल 518 प्रदर्श प्रस्तुत किए गए, जिनमें से 138 का चयन कर प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया।
समापन अवसर पर संयुक्त निदेशक उद्यान संजय कुमार सिन्हा ने कहा कि आधुनिक तकनीक अपनाकर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने किसानों को विविध फसलों की खेती और जैविक विधि अपनाने के लिए प्रेरित किया।
विशुनपुर बखरी के किसान सुनील कुमार ने बताया कि वे ओल की खेती के साथ रबी फसल लगाकर अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं। एक कठ्ठा में ओल की खेती पर लगभग चार हजार रुपये खर्च आता है, जबकि 15 से 20 हजार रुपये तक आमदनी हो जाती है।
ओल के बीच में गेहूं, तोरी, बकला और मसूर लगाने से अतिरिक्त लाभ मिलता है। मड़वन गंवसरा के किसान राजेश रंजन कदिमा लेकर पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि कदिमा बारी या खेत के किनारे भी लगाया जा सकता है। मई में रोपाई के बाद यह दिसंबर-जनवरी में बाजार में आता है।
एक पौधे पर लगभग सौ रुपये खर्च होता है और एक से डेढ़ क्विंटल तक फलन होता है, जो 15 से 20 रुपये प्रति किलो बिकता है। हसनपुर बंगरी के किसान पवन कुमार ने बताया कि वे वर्मी कम्पोस्ट विधि से गोभी और बैंगन की खेती करते हैं। एक कठ्ठा में लगभग एक हजार रुपये खर्च कर 12 हजार रुपये तक आमदनी हो जाती है। अधिकारियों ने प्रदर्शनी का भ्रमण किया। कार्यक्रम में जिला उद्यान पदाधिकारी आभा कुमारी सहित कई अधिकारी उपस्थित रहे। |