समाहरणालय औरंगाबाद
जागरण संवाददाता, औरंगाबाद। न्यायालय सिविल जज सीनियर डिविजन प्रथम डॉ. दीवान फहद की कोर्ट ने बुधवार को समाहरणालय को कुर्क करने का आदेश दिया है। डिक्री अनुपालन नहीं होने पर कोर्ट ने संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने पुराने इजराय वाद में डिक्री के अनुपालन नहीं होने पर ऋणी की संपत्ति कुर्क करने का आदेश दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि पर्याप्त समय दिए जाने के बावजूद डिक्रीधारी अधिवक्ता हरेकृष्ण प्रसाद को देय राशि का भुगतान नहीं किया गया, जिससे वाद का निस्तारण लंबित है।
डिक्री राशि के भुगतान को लेकर स्पष्ट उल्लेख नहीं
अभिलेख के अवलोकन से ज्ञात हुआ कि डिक्रीधारी द्वारा 15 अक्टूबर 2025 को दायर आवेदन के आधार पर 14 नवंबर 2025 को कारण पृच्छा नोटिस जारी किया गया था। इसके आलोक में अपर समाहर्ता और विशेष कार्यक्रम सह प्रभारी पदाधिकारी, जिला विधि शाखा के कार्यालय से 9 दिसंबर 2025 को प्रतिवेदन प्राप्त हुआ, किंतु उसमें डिक्री राशि के भुगतान को लेकर कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं था।
11 दिसंबर 2025 तथा पांच फरवरी 2026 को सरकारी अधिवक्ता (जीपी) की ओर से डिक्री के अनुपालन हेतु समय की मांग की गई, परंतु पर्याप्त समय बीत जाने के बाद भी राशि का भुगतान नहीं किया गया।
समाहरणालय को कुर्क करने का आदेश
न्यायालय ने इसे गंभीर मानते हुए कहा कि यह इजराय वाद प्राचीनतम वाद की श्रेणी में आता है, जिसके त्वरित निष्पादन हेतु उच्चतम न्यायालय एवं उच्च न्यायालय द्वारा भी दिशा-निर्देश जारी है।
उपरोक्त परिस्थितियों को देखते हुए न्यायालय ने समाहरणालय को कुर्क करने का आदेश दिया है। व्यवहार न्यायालय के नाजिर को निर्देश दिया गया है कि उक्त संपत्ति को नियमानुसार कुर्क कर 15 दिनों के भीतर न्यायालय में प्रतिवेदन समर्पित करें। मामले की अगली सुनवाई नौ मार्च को निर्धारित की गई है।
अधिवक्ता ने बताया कि इस आदेश के बाद समाहरणालय की नीलामी की प्रक्रिया की जाएगी। डीएम अभिलाषा शर्मा ने बताया कि क्या मामला है, न्यायालय के आदेश को दिखवाया जाएगा। |